आरक्षण मामले में गुर्जर समुदाय एक बार फिर सड़क पर उतर सकते है

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राजस्थान में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के मसले पर सरकार के रवैये से गुर्जर समाज में गहरी नाराजगी पनप गई है। हाई कोर्ट से यह आरक्षण निरस्त होने के बाद सरकार की तरफ से कोई कारगर कानूनी कदम नहीं उठाने से गुर्जर एक बार फिर सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। इसके लिए गुर्जरों ने 25 फरवरी को करौली जिले के गुडला में समाज की महापंचायत बुलाई है। इसमें ही आंदोलन की रणनीति तैयार करने का एलान किया गया है। विशेष पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुडे मसले पर यहां कैबिनेट सब कमेटी की बैठक का बहिष्कार कर गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने साफ कर दिया कि अब सरकार से कोई बातचीत नहीं की जाएगी। समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और उनके साथियों ने मंत्रिमंडल की उप समिति की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इस बैठक में गुर्जर नेताओं को भी बुलाया गया था। संघर्ष समिति के प्रवक्ता डाक्टर हिम्मत सिंह ने गुरुवार को यहां बताया कि सरकार गुर्जरों के विशेष पिछड़ा वर्ग के पांच फीसद आरक्षण के मसले पर गंभीर नहीं है। अदालत से निरस्त होने के बाद गुर्जरों की स्थिति सामान्य वर्ग की हो गई है। इसके चलते सरकारी नौकरियों में चयनित उनके समाज के युवाओं को अब नौकरियां नहीं दी जा रही हैं। इस मामले में सरकार ने भरोसा दिया था कि पूर्व में विशेष पिछड़ा वर्ग के तहत चयनित युवाओं को नियुक्ति दी जाएगी। इस मामले में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे दखल देकर समस्याओं का समाधान के लिए वार्ता करती है तो वे तैयार है। गुर्जरों की मांगों के प्रति सरकार का जो रवैया है उससे ही नाराज होकर समाज के प्रतिनिधि कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में नहीं गए। संघर्ष समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह ने कहा कि गुर्जर आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को भी सरकार ने वापस नहीं लिया है। सरकार ने इन्हें वापस लेने का भी समझौता किया था। कोटा जिले के रामगंजमंडी में 18 गुर्जर आंदोलनकारियों को पांच पांच साल की सजा हो गई। इन पर पुलिस चौकी जलाने समेत कई मामले दर्ज किए गए थे। आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे सरकार ने वापस लेने की बात कही थी। इस पर अमल नहीं होने से भी प्रदेश भर में गुर्जर समाज में गहरी नाराजगी पनप गई है। इन सभी मामलों पर गुर्जरों की 25 फरवरी को होने वाली महापंचायत में फैसला लेकर आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। दूसरी तरफ यहां शासन सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की उप समिति की बैठक में फैसला किया गया कि विशेष पिछड़ा वर्ग की भर्तियों के लिए कानूनी राय लेकर सरकार फैसला करेगी। इसमें आरक्षण निरस्त होने के पहले और बाद के बारे में कानूनी राय ली जाएगी। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने की। राठौड़ ने बताया कि विशेष पिछड़ा वर्ग के पांच फीसद आरक्षण को फिर से स्थापित करने के लिए सरकार पूरे प्रयास कर रही है। गुर्जरों का विशेष पिछड़ा वर्ग का आरक्षण निरस्त होने के बाद उनकी स्थिति सामान्य वर्ग की हो गई है।

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