आडवाणी-जोशी समेत बड़े नेताओं पर चलेगा केस

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सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी ध्वंस केस में बुधवार को बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि बीजेपी के बड़े नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती आदि पर आपराधिक साजिश का मामला चलेगा। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले में चल रहे दो अलग-अलग मामलों को क्लब कर दिया जाए और रायबरेली में चल रहा मामला लखनऊ में ही चलेगा।
यह फैसला ऐसे वक्त में सामने आया है, जब जल्द ही राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने वाला है। आडवाणी और जोशी, दोनों ही राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। जहां तक कल्याण सिंह का सवाल है, चूंकि वह गवर्नर हैं, इसलिए उन पर मुकदमा नहीं चल सकता। हालांकि, कल्याण सिंह और केंद्रीय मंत्री उमा भारती पर पद छोड़ने का नैतिक दबाव बन सकता है।
कोर्ट ने बुधवार को अपना आदेश पढ़ते हुए कहा कि वह सीबीआई की अपील को स्वीकार कर रहे हैं। सीबीआई ने कोर्ट से मांग की थी कि बीजेपी नेताओं समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मामला जोड़ा जाए। कोर्ट ने कहा है कि मामले की डे टू डे सुनवाई हो और पूरी प्रक्रिया दो साल में पूरा कर लिया जाए।
क्या है मामला
1992 में बाबरी मस्जिद गिराने को लेकर दो मामले दर्ज किए गए थे। एक मामला (केस नंबर 197) कार सेवकों के खिलाफ था, जबकि दूसरा मामला (केस नंबर 198) मंच पर मौजूद नेताओं के खिलाफ। केस नंबर 197 के लिए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से इजाजत लेकर ट्रायल के लिए लखनऊ में दो स्पेशल कोर्ट बनाए गए, जबकि 198 का मामला रायबरेली में चलाया गया। केस नंबर 197 की जांच सीबीआई को दी गई, जबकि 198 की जांच यूपी सीआईडी ने की थी। केस नंबर 198 के तहत रायबरेली में चल रहे मामले में नेताओं पर धारा 120 बी नहीं लगाई गई थी, लेकिन बाद में आपराधिक साजिश की धारा जोड़ने की कोर्ट में अर्जी लगाई गई और कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी।
हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया कि रायबरेली केस को भी लखनऊ लाया जाए। हाई कोर्ट ने मना कर दिया और कहा कि यह केस ट्रांसफर नहीं हो सकता, क्योंकि नियम के तहत 198 के लिए चीफ जस्टिस से मंजूरी नहीं ली गई। इसके बाद रायबरेली में चल रहे मामले में आडवाणी समेत अन्य नेताओं पर साजिश का आरोप हटा दिया गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 20 मई 2010 के आदेश में ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। इस फैसले को सीबीआई ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। चुनौती देने में आठ महीने की देरी की गई।
सीबीआई की दलील
सीबीआई की ओर से दलील दी गई थी कि बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य 13 बीजेपी नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का केस चलना चाहिए। गौरतलब है कि तकनीकी आधार पर इनके खिलाफ साजिश का केस रद्द किया गया था जिसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लखनऊ में कार सेवकों के खिलाफ केस लंबित है जबकि रायबरेली में बीजेपी नेताओं के खिलाफ चल रहा है।
नेताओं ने जॉइंट ट्रायल का किया है विरोध
आडवाणी और जोशी की ओर से पेश वकील वेणुगोपाल ने जॉइंट ट्रायल का विरोध किया था साथ ही केस ट्रांसफर का भी विरोध किया था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि हम रायबरेली से केस लखनऊ ट्रांसफर करना चाहते हैं और इसके लिए हम अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कर सकते हैं। अदालत ने कहा था कि हम जस्टिस चाहते हैं।

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