CPEC के विरोध में भारत को मिला अमेरिका का साथ |

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वाशिंगटन। चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीइसी) के विरोध में भारत को अमेरिका का साथ मिल गया है। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि यह कॉरिडाेर विवादित क्षेत्र से होकर गुजरता है और किसी भी देश को अपने आप को ऐसी स्थिति में नहीं रखना चाहिए कि वह ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल पर निर्देश दें।

आपको बता दें कि करीब 60 अरब डॉलर के इस प्रोजेक्‍ट को लेकर अपनी संप्रभुता की चिंताओं के कारण भारत इस साल मई में बेल्ट एंड रोड फोरम (बीआरएफ) में शामिल नहीं हुआ था। सीपीइसी चीन की प्रतिष्ठित ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) पहल की अहम परियोजना है, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरती है।

बीते सप्ताह भारत के अपने पहले दौरे से लौटे अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस मंगलवार को चीन की महत्वाकांक्षी ओबीओआर पहल का कड़ा विरोध करते हुए नजर आए। भारत दौरे के दौरान उन्होंने अपनी समकक्ष निर्मला सीतारमण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

जिम मैटिस ने कांग्रेस की एक बहस में सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्यों से कहा, ‘वैश्वीकृत दुनिया में कई बेल्ट और कई रोड हैं और किसी भी देश को अपने आप को ऐसी स्थिति में नहीं रखना चाहिए कि वह ‘वन बेल्ट, वन रोड’ पर निर्देश दें।’

वहीं सीपीइसी पर भारत के रुख का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, ‘जैसा कि कहा जा रहा है, वन बेल्ट वन रोड विवादित क्षेत्र से हो कर गुजरेगा, तो मुझे लगता है कि इससे भी संवेदनशीलता का पता चलता है।’ गौरतलब है कि जिम मैटिस इस संबंध में ओबीओआर और चीन की नीति को लेकर सीनेटर चार्ल्स पीटर के एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

चार्ल्‍स पीटर ने सवाल किया था, ‘वन बेल्ट वन रोड नीति के तहत यूरेशिया पर दबदबा बनाने और वहां प्राकृतिक संसाधनों की उम्मीद में चीन दोनों महाद्वीपों और समुद्री हितों को नियंत्रित करना चाहता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी नीति के साथ चीजें ठीक नहीं है तो आप अफगानिस्तान और खासतौर से वन बेल्ट वन रोड के संबंध में चीन को कैसी भूमिका निभाते हुए देखना चाहते हैं।’

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