हार के बाद भाजपा ने भी लगाए थे 2009 में ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप

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नई दिल्ली : पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने वाले दलों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाए कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे लोकतंत्र की हत्या तक करार दिया। वहीं, उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत ने अपनी हार को ईवीएम का चमत्कार बताया। हालांकि चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।
वैसे 2009 में हार के बाद भाजपा (एनडीए) ने बाकायदा इसके खिलाफ अभियान चलाया था। आरोप वही थे, जो आज मायावती लगा रही हैं। तब इन मशीनों के खिलाफ बोलने की कमान संभाली थी किरीट सौमैया ने। सौमैया तो बाकायदा ईवीएम गड़बड़ी की कहानी अलग-अलग शहरों में जाकर सुनाया करते थे। उनके साथ एक आईटी विशेषज्ञ भी हुआ करता था, जो कम्प्यूटर-लैपटॉप पर दिखाता था कैसे गड़बड़ी की जा सकती है। इसके बाद भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव में ईवीएम पर डेमोके्रसी एट रिस्क, कैन वी ट्रस्ट अवर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन शीर्षक से एक किताब लिखी थी। इसकी भूमिका खुद भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी ने लिखी थी। इस किताब में ईवीएम में की जाने वाली गड़बड़ियों का जिक्र है।
0 वर्ष 1989-90 में बनी ईवीएम का प्रयोगात्मक आधार पर पहली बार प्रयोग नवंबर 1998 के विधानसभा चुनावों में किया गया। इन निर्वाचन क्षेत्रों में से मध्यप्रदेश में 5, राजस्थान में 5, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में 6 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र थे।
0 भारत में इसका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. बेंगलुरु व इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन आॅफ इंडिया लि. हैदराबाद करते हैं।
0 अधिकतम 3840 मत दर्ज किए जा सकते हैं। ईवीएम अधिकतम 64 अभ्यर्थियों के लिए काम करती है।
0 ऐसे क्षेत्रों में भी इस्तेमाल हो सकती है, जहां बिजली कनेक्शन नहीं है। वर्ष 1989-90 के समय खरीदी गई प्रति ईवीएम की लागत 5,500 रुपए थी। 10 वर्ष और उससे भी अधिक समय तक रहता है कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में परिणाम ईवीएम के बारे में तथ्य ऐसे काम करती है।
विदेशों में भी रही है विवादित
0 नीदरलैंड्स ने पारदर्शिता न होने का आरोप लगा प्रतिबंध लगाया।
0 जर्मनी ने असंवैधानिक बताते हुए प्रतिबंध लगाया।
0 आयरलैंड ने 51 मिलियन पाउंड खर्च कर तीन साल तक इस पर शोध किया। फिर प्रतिबंध लगाया।
0 इटली ने प्रतिबंध किया कि इससे नतीजों को बदल सकते हैं।
भारत में कभी सिद्ध नहीं हुई टैंपरिंग
ईवीएम टैंपरिंग से संबंधित जितने भी मामले सुप्रीम कोर्ट में आए, किसी में भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ। चुनाव आयोग आम लोगों को आंमत्रित करता है कि वे आयोग आकर ईवीएम की तकनीक को गलत सिद्ध करने के लिए अपने दावे पेश करें।
इंटरनेट कनेक्शन नहीं, छेड़छाड़ नहीं हो सकती
0 ईवीएम पर मैकेनिकल छेड़छाड़ और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स का कोई असर नहीं होता है। इसमें इंटरनेट का कोई कनेक्शन नहीं होता है। इसे आॅनलाइन हैक नहीं किया जा सकता।
0 वन टाइम प्रोग्रामेबल चिप बगैर वाईफाई और किसी कनेक्शन के चलती है। किसी दूसरे यंत्र से कोई संपर्क न होने के कारण इसमें छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
0 ईवीएम का सॉफ्टवेयर अलग से रक्षा मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा मंत्रालय के यूनिट बनाते हैं।
0 बगैर पीठासीन अधिकारी के बैलेट को कंट्रोल यूनिट के साथ जोड़े कोई वोट नहीं कर सकता है।
0 ईवीएम मशीन के सैंपल बनाने के बाद इसे लगातार चेक किया जाता है, ताकि मतदान के दौरान कोई गड़बड़ी न हो।
0 2006 के बाद से ईवीएम में तारीख और समय को लेकर नए फीचर जोड़े गए। इससे हर वोटर का डेटा और उसका वोट सुरक्षित रहता है।
0 इसमें एक कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और पांच मीटर केबल होती है। 6 वोल्ट की अल्कलाइन बैटरी होती है।
0 कंट्रोल यूनिट मतदान अधिकारी के पास होती है व बैलेटिंग यूनिट वोटिंग कम्पार्टमेंट के अंदर रखी होती है।
0 कंट्रोल यूनिट का प्रभारी मतदान अधिकारी बैलेट बटन दबाता है। यह मतदाता को बैलेटिंग यूनिट पर पसंद के अभ्यर्थी एवं प्रतीक के सामने बटन को दबाकर मत डालने में सक्षम बनाएगा।
कोटेशन
वैसे 2009 में हार के बाद भाजपा (एनडीए) ने बाकायदा इसके खिलाफ अभियान चलाया था। आरोप वही थे, जो आज मायावती लगा रही हैं। तब इन मशीनों के खिलाफ बोलने की कमान संभाली थी किरीट सौमैया ने। सौमैया तो बाकायदा ईवीएम गड़बड़ी की कहानी अलग-अलग शहरों में जाकर सुनाया करते थे। उनके साथ एक आईटी विशेषज्ञ भी हुआ करता था, जो कम्प्यूटर-लैपटॉप पर दिखाता था कैसे गड़बड़ी की जा सकती है।

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