12 साल के प्रग्गनानंधा ने रचा इतिहास, बने दुनिया के दूसरे सबसे छोटे ग्रांडमास्टर

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भारत के आर प्रग्गनानंधा ने मात्र 12 साल की उम्र में शतरंज की दुनिया में नाम कमा लिया है। वह इटली में आयोजित हो रहे ग्रेडिन ओपन के फाइनल राउंड में पहुंच गए हैं। इसी के साथ वह भारत के सबसे छोटे और दुनिया के दूसरे सबसे छोटे ग्रांडमास्टर बन गए हैं। प्रग्गनानंधा के पास शतरंज के ग्रांडमास्टर का खिताब है।

प्रग्गनानंधा ने 2016 में 10 साल 10 महीने 19 दिन में यंगेस्ट इंटरनेशनल मास्टर बनने का खिताब अपने नाम किया था। प्रग्गनानंधा फाइनल राउंड में रोनाल्ड के साथ खेल रहे थे, जो कि जीत के लिए आश्वस्त थे। उन्होंने प्रतियोगिता में ग्रैंडमास्टर मोरोनी लूका जूनियर को आठ राउंड के मुकाबले में हराकर जीत हासिल की।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रग्गानानंधा ने कहा कि इस उपलब्धि के बाद वह काफी राहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शायद अभी भी पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं। प्रग्गू ने कहा, ‘आठवें राउंड में पहुंचने के दौरान किसी ने बताया कि मैं ग्रैंडमास्टर बनने वाला हूं। उससे पहले मुझे नहीं पता था। मैंने इस बारे नहीं सोचा क्योंकि इससे मेरा ध्यान भटक सकता था। मेरा अगला लक्ष्य विश्व चैंपियन बनने का है।’

शतरंज के क्षेत्र में महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद भारत का रोशन किया। उन्होंने 18 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया था। अब प्रग्गनानंधा ने इतनी कम उम्र में उपलब्धि हासिल कर भारत का नाम विश्वभर में रोशन किया है।

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