श्रीलंका के पीएम रानिल विक्रमसिंघे बोले न चीन के कर्ज के जाल में फंस रहा देश और न ही बंदरगाहों पर कोई चीनी नियंत्रण

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने उन सभी दावों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि श्रीलंका रणनीति तौर पर अहमियत रखने वाले अपने बंदरगाहों का नियंत्रण चीन के हाथों में दे रहा है। साथ ही उन्‍होंने उन खबरों से भी इनकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि उनका देश उच्‍च ब्‍याज दरों वाले चीनी कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है। विक्रमसिंघे ने विएतनाम की राजधानी हनोई में जारी आसियान के इकोनॉमिक फोरम में यह बात कही है। विक्रमसिंघे अमेरिकी चैनल सीएनबीसी के साथ बातचीत कर रहे थे और इसी दौरान एक सवाल के जवाब में उन्‍होंने यह कहा।

विक्रमसिंघे ने बताया कि श्रीलंका में चीन का काफी निवेश है और काफी कर्ज भी है लेकिन यह उनके देश के लिए किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। विक्रमसिंघे ने कहा कि श्रीलंका हमेशा से ही बिना साझीदार वाला देश रहा है और साल 1948 से इसी तरह से है। विक्रमसिंघे का यह बयान उन खबरों के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि पिछले वर्ष सदर्न हंबनटोटा में स्थित बंदरगाह को 99 वर्षों की लीज पर देने के लिए श्रीलंका और चीन के बीच करार हुआ है। अमेरिका, जापान और भारत जैसे देशों की ओर से इस बात को जोर देकर कहा गया था कि इस बंदरगाह को मिलिट्री गतिविधियों से दूर रखा जाना चाहिए। श्रीलंका के पीएम विक्रमसिंघे ने इन दावों को मानने से भी इनकार कर दिया कि उनका देश दुनिया भर में तेजी से टूटते बाजारों के बीच एशिया का सबसे अस्थिर देश बनने की कगार पर है।

उन्‍होंने कहा कि उनका मानना है कि श्रीलंका के अलावा एशिया के बाकी देश भी घाटे में हैं और यह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। लेकिन इसके बाद भी श्रीलंका की कर्ज लेने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है। पीएम विक्रमसिंघे के मुताबिक उनका देश लंबे समय के लिए आर्थिक स्थिरता का का निर्माण कर रहा है। साथ ही चाय और कपड़ों से हटकर अब उच्‍च मूल्‍यों वाली चीजों और सेवाओं के आयात पर भी ध्‍यान केंद्रित किया जा रहा है।

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