भारत के एकदम करीब म्‍यांमार में होगा चीन का बंदरगाह, कई वर्षों के बाद बंगाल की खाड़ी में ज्‍वॉइन्‍ट वेंचर को राजी दोनों देशों

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चीन ने अब भारत के एकदम करीब अपना कब्‍जा करने का मन बना लिया है। चीन और म्‍यांमार के बीच गुरुवार को मल्‍टी बिलियन डॉलर डील साइन हुई है। इस डील के तहत दोनों देश म्‍यांमार के क्‍याउकप्‍यू में एक पोर्ट प्रोजेक्‍ट पर काम करेंगे। म्‍यांमार में स्थित क्‍याउकप्‍यू रणनीतिक तौर पर काफी अहम है क्‍योंकि यह बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है। दोनों देशों के बीच कई वर्षों तक इस प्रोजेक्ट के बजट और दूसरे मुद्दों को लेकट समझौते पर मुश्किलें बनी हुई थीं। भारत के लिए यह खबर काफी निराश करने वाली है क्‍योंकि अप्रत्‍यक्ष तौर पर चीन, भारत के अंदर ही दाखिल हो जाएगा।

म्‍यांमार की राजधानी ने पाई तॉ में चीनी प्रतिनिधिदल जिसमें चीन का सरकारी नियंत्रण वाला निवेश ग्रुप सीआईटीआईसी भी शामिल था, उसने क्‍याउकप्‍यू स्‍पेशल इकोनॉमिक जोन की मैनेजमेट कमेटी के साथ मिलकर एक एग्रीमेंट साइन किया है। इसके तहत पोर्ट का निर्माण किया जाएगा। इस समझौते के तहत चीन प्रोजेक्‍ट के लिए 70 प्रतिशत निवेश करेगा और म्‍यांमार बाकी का 30 प्रतिशत वहन करेगा। इस प्रोजेक्‍ट की शुरुआत में कुल 1.3 बिलियन डॉलर वाले निवेश को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके अलावा पोर्ट के संचालन के लिए एक ज्‍वॉइन्‍ट वेंचर तैयार किया जाएगा। इस एग्रीमेंट के साइन होने के साथ ही पोर्ट प्रोजेक्‍ट पर एक अहम कदम दोनों देशों ने उठाया है। यह प्रोजेक्‍ट साल 2015 से अटका हुआ था। यह प्रोजेक्‍ट बेल्‍ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) का ही हिस्‍सा है।

चीन की निवेश कंपनी ने पहली बार दिसंबर 2015 में पोर्ट के प्रोजेक्‍ट के लिए बोली लगाई थी। उस वर्ष टेंडर इस कंपनी को मिल भी गया था और सात बिलियन डॉलर की कीमत के साथ भविष्‍य में होने वाले विकास पर रजामंदी जताई गई थी। लेकिन दोनों पक्षों के बीच प्रोजेक्‍ट की फंडिंग लेकर मतभेद थे। शुरुआत में चीन पहले 85 प्रतिशत तक का खर्च उठाने को तैयार था। लेकिन चुनावों के बाद जब म्‍यांमार में नई सरकार आई तो उसने चीनी कंपनियों की हिस्‍सेदार को 70 प्रतिशत करने के लिए कहा। कई हफ्तों तक चली बातचीत और बीआरआई की आलोचना की वजह से प्रोजेक्‍ट अटक गया।

कुछ विदेशी आलोचकों ने कहा कि चीन का प्रोजेक्‍ट म्‍यांमार पर कर्ज का संकट बढ़ा रहा है और यह प्रोजेक्‍ट दूसरे देश की संप्रभुता के लिए खतरा है। चीनी सरकार ने ले‍किन हमेशा इसी बात पर जोर दिया है कि बीआरआई एक ऐसा मंच है जो क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक संरचना को मजबूत करेगा। इसके अलावा उन देशों में रोजगार का निर्माण करेगा और आर्थिक तरक्‍की में मदद करेगा जो इससे होकर गुजरते हैं। क्‍याउकप्‍यू प्रोजेक्‍ट के बाद चीनी मीडिया की ओर से अनुमाल लगाया गया है कि 100,000 नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। एक बार पूरा हो जाने पर बंदरगाह से हर वर्ष करीब 3.2 बिलियन डॉलर का फायदा हो सकेगा।

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