इंडोनेशिया में वक्त के साथ मलबे में जीवितों की संभावना शून्य होती जा रही है

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इंडोनेशिया में भूकंप एवं सुनामी से मरने वालों की संख्या बुधवार को 1,400 से ऊपर पहुंच गई। इसी के साथ मलबे में से जीवित लोगों के निकलने की उम्मीद भी घटती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि पूरी नहीं हो पा रही जरूरतों की सूची बहुत लंबी है।

राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पूर्वो नुग्रोहो ने कहा कि बर्बाद हुए पालू शहर के आस-पास के चार इलाकों में मृतकों की संख्या 1,407 तक पहुंच गई है और 519 शवों को दफनाया जा चुका है। अधिकारियों ने मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश के लिए शुक्रवार की अस्थायी समय सीमा तय की है हालांकि माना यही जा रहा है कि हफ्तेभर पहले आई दोहरी आपदा के बाद किसी के जीवित मिलने की संभावना तब तक लगभग शून्य हो जाएगी।

सरकारी बचाव कर्मी पूरी तरह बर्बाद हुए पालू शहर के आधा दर्जन प्रमुख स्थानों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इनमें होटल रोआ-रोआ भी शामिल है जहां अब भी 60 लोगों के दबे होने की आशंका है। एक शॉपिग मॉल, एक रेस्तरां और बालारोआ इलाके भी इनमें शामिल हैं।

अधिकारियों ने कहा कि कम से कम 150 लोग ऐसे हैं जिनके बारे में यह स्पष्ट नहीं है कि वह मलबे के नीचे दबे भी हैं या नहीं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कार्यालय के अनुसार करीब 2,00,000 लोगों को फौरन मदद की जरूरत है। इनमें कई हजार बच्चे शामिल हैं। 7.5 तीव्रता के भूकंप और इसके बाद आई सुनामी ने करीब 66,000 घरों को बर्बाद या तबाह कर दिया है।

इंडोनेशियाई सरकार भले ही विदेशी बचाव टीमों से तैयार रहने की अपील कर रही हो लेकिन डोंग्गाला प्रांत के वानी जैसे सुदूर गांवों में बहुत कम मदद पहुंची है और वहां उम्मीदें धूमिल होती जा रही हैं। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र ने राहत एवं बचाव कार्यों की धीमी गति पर रोष भी प्रकट किया।

आपदा में जीवित बचे लोग खाने एवं साफ पानी की आपूर्ति की कमी की वजह से भूख और प्यास से लड़ रहे हैं और स्थानीय अस्पताल बड़ी संख्या में घायलों से भरे पड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार अब भले ही मदद की पेशकश आमंत्रित कर रही हो लेकिन इसे लागू किए जाने के लिए अब भी कोई पद्धति उपलब्ध नहीं है।

पालू हवाईअड्डे पर विमान उतरने वाली जगहों को इंडोनेशियाई सेना ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। सहायता पहुंचाने के लिहाज से बेहद महत्त्वपूर्ण स्थल पालू का बंदरगाह क्षतिग्रस्त है। यहां निराशा के बादल और गहराते जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों को मंगलवार को दुकानों को तोड़ रहे लोगों को हटाने के लिए चेतावनी के तौर पर मजबूरन हवा में गोलियां चलानी पड़ी और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

ऐसी खबर भी मिली है कि इंडोनेशिया में सामाजिक मामलों के मंत्रालय के छह ट्रकों को पालू के रास्ते में लूट लिया गया। इन पर सहायता सामग्री लदी हुई थी। कुछ जगहों पर कुछ लीटर पेट्रोल लेने के लिए लोगों को 24 घंटे से भी ज्यादा वक्त तक कतार में खड़ा रहना पड़ा। स्वच्छता भी एक बड़ा मुद्दा बन रहा है जहां लोगों के पास शौचालय की कोई सुविधा नहीं है।

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