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विजयादशमी पर निकलती है श्री महाकालेश्वर की सवारी

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mahakaleswarउज्जैन : विजयादशमी पर्व विजय का प्रतीक है। यह पर्व जहां पर भगवान श्री राम की लंकेश रावण पर विजय का उल्लास जगाता है वहीं यह विजयोत्सव भी है। इस दिन बारह ज्योर्तिलिंग में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर से भगवान श्री महाकालेश्वर नगर भ्रमण पर निकलते हैं। उज्जैन के राजा श्री महाकालेश्वर माने जाते हैं और उन्हें राजसी ठाठ बांट के बीच चांदी की पालकी में विराजित कर नए शहर की ओर ले जाया जाता है।
शाम करीब 4 बजे श्री महाकालेश्वर की पालकी गाजे – बाजे के साथ निकलती है। प्रतिवर्ष विजयादशमी का पर्व ऐसा पहला अवसर होता है जब भगवान श्री महाकालेश्वर चांदी की पालकी में सवार होकर नए शहर की ओर जाते हैं। दरअसल नई बसाहट फ्रीगंज और इसके आसपास के विस्तारित क्षेत्र में है। ऐसे में इसे नया शहर कहा जाता है दूसरी ओर चामुंडा माता मंदिर और इसके आसपास के विस्तारित क्षेत्र से पुराने शहर की सीमा प्रारंभ हो जाती है।
भगवान श्री महाकालेश्वर नए शहर में नगर भ्रमण पर होते हैं। इस दौरान श्री महाकालेश्वर की पालकी दशहरा मैदान पर पहुंचती है। यहां भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन-अभिषेक होता है। साथ ही शमी पूजन भी किया जाता है। शमी पूजन के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर की पालकी फिर से मंदिर की ओर निकल जाती है। एक तरह से यह पर्व श्री राम और भगवान श्री महाकालेश्वर की आराधना का पर्व हो जाता है। बड़े पैमाने पर श्रद्धालु सड़कों के दोनों ओर खड़े होकर भगवान श्री महाकालेश्वर की पालकी के दर्शन करते हैं।

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