लोगों को उलझन में रख दिया आरुषि हत्या मामला |

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नोएडा :। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संदेह लाभ देते हुए आरुषि के माता-पिता डॉ. नूपुर व डॉ. राजेश तलवार को हत्या के आरोप से भले ही बरी कर दिया, लेकिन इसके साथ ही उलझन और भी बढ़ गई। लोगों के जेहन में दो सवाल कौंध रहे हैं, पहला आरुषि- हेमराज को किसने मारा और दूसरा कि क्यों मारा? अदालत ने तो साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया, लेकिन इसने गौतमबुद्ध नगर पुलिस के साथ-साथ देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआइ की साख पर सवाल खड़ा कर दिया।
दुनिया में किसी भी हत्याकांड का पर्दाफाश तीन साक्ष्य पर ही निर्भर करता है। प्रत्यक्ष, फॉरेंसिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य। आरुषि हत्याकांड में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं था। आरुषि और हेमराज के शव मिलने के बाद नोएडा पुलिस के पास फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने का मौका था, जिसे उन्होंने गंवा दिया।
नोएडा पुलिस ने थोड़ा खुद, थोड़ा मीडिया कर्मियों और शेष साक्ष्य अन्य लोगों को मिटाने का मौका दे दिया। आरुषि हत्याकांड के 15 दिनों बाद सीबीआइ जांच करने आई। उसने फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए, लेकिन तब तक बहुत कुछ धुल चुका था।

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