रिजर्व बैंक ने उच्च न्यायालय से कहा, एटीएम से निकासी की सीमा नीतिगत फैसला

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rbiनयी दिल्ली, छह नवंबर :भाषा: भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंक ग्राहकों द्वारा एटीएम से बिना किसी शुल्क के पैसा निकालने की सीमा एक नीतिगत फैसला है जो जनहित में लिया गया है।
केंद्रीय बैंक ने दिल्ली उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी तथा न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ को सूचित किया कि नकदी के इस्तेमाल को कम करने तथा देश में इलेक्ट्रानिक लेनदेन को प्रोत्साहन देने के लिए एटीएम सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान रिजर्व बैंक ने यह बात कही। याचिका में बैंक ग्राहकों को अपने खुद के बैंक के एटीएम से असीमित निकासी की अनुमति का निर्देश देने की अपील की गई है।
रिजर्व बैंक ने जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह टिकने योग्य नहीं है और इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए और केंद्रीय बैंक ने किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया है।
रिजर्व बैंक के वकील ने कहा कि पीआईएल का इस्तेमाल वित्तीय और आर्थिक फैसलों को चुनौती देने के लिए हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। ये फैसले केंद्रीय बैंक ने अपने प्रशासनिक और सांविधिक अधिकारों का इस्तेमाल कर जनहित में लिए हैं।
इस पर पीठ ने रिजर्व बैंक से सुनवाई की अगली तारीख 5 दिसंबर तक हलफनामा देने को कहा।
रिजर्व बैंक के नए दिशानिर्देशांे के अनुसार छह महानगरों..दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद तथा बेंगलुर के बैंक ग्राहकों को एक महीने में बिना किसी शुल्क से एटीएम से सिर्फ पांच निकासी की अनुमति है। इस सीमा से अधिक प्रत्येक बार ग्राहक को 20 रपये का शुल्क देना होगा।

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