ITBP का इस्तेमाल सिर्फ बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए: संसदीय समिति

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संसदीय समिति ने इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) को आंतरिक सुरक्षा में न लगाकर सिर्फ सीमा से जुड़े टास्क पर ही तैनात किये जाने के लिए कहा है। आईटीबीपी का इस्तेमाल आंतरिक सुरक्षा और एंटी नक्सल ऑपरेशन में किया जाता रहा है। हाल ही में बॉर्डर गार्डिंग फोर्सस की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की गई थी। आईटीबीपी को चीन से सटे देश की ऊबड़-खाबड़ वाली सीमा पर तैनात किया जाता है, जिन्हें पिछले काफी वक्त से गैर-सीमा वाले क्षेत्रों में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम इस समिति का नेतृत्व कर रहे थे, जिसमें कहा गया कि बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए ही आईटीबीपी का निर्माण किया गया था। हालांकि, कुछ आईटीबीपी की बटालियन को एंटी नक्सल ऑपरेशन और आंतरिक सुरक्षा के लिए भी तैनात किया गया है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि आईटीबीपी के जवान लंबे समय तक खतरनाक मौसम में तैनात रहते हैं और ऐसे में उनको आराम की भी जरुरत होती है। आंतरिक सुरक्षा में तैनात किये जाने पर अक्सर आईटीबीपी के जवान शिकायत करते हैं। इससे उनके ट्रेनिंग और रहन-सहन पर भी प्रभाव पड़ता है।

आईटीबीपी को जिन गैर-सीमा पर इस्तेमाल किया जाता है उसमे वीआईपी प्रोटेक्शन, एंटी नक्सल ऑपरेशन, अफगानिस्तान में सिक्योरिटी डिप्लोमेटिक मिशन, आपदा प्रबंध, चुनावों में ड्यूटी, कैलाश मानसरोवर और अमरनाथ यात्रा पर निगरानी जैसी एक्टिविटी शामिल है।

बता दें कि आईटीबीपी की कुल 60 बटालियन में से 32 सीमा पर तैनात हैं, 11 आंतरिक सुरक्षा के लिए, 8 एंटी नक्सल ऑपरेशन और 5 बटालियन अलग-अलग जगहों पर तैनात करने के लिए रिजर्व्ड रखा गया है।

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