जम्मू-कश्मीर में आठवीं बार लगा राज्यपाल शासन, जानें इससे पहले कब-कब लागू हुआ

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जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी का गठबंधन टूट गया है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में राज्य के बड़े मंत्रियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें उन्होंने पीडीपी से अपना समर्थन वापस लेने का ऐलान किया। बीजेपी नेता राम माधव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पीडीपी से अलग होने की घोषणा की। बीजेपी ने राज्यपाल एनएन वोहरा को समर्थन वापसी का पत्र देते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी। अब राज्य में आठवीं बार राज्यपाल शासन लागू हो गया है।

बीजेपी के समर्थन वापस लेने के बाद राज्य के चुनाव परिणाम में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सरकार बनाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। इसके बाद राज्य में फिर से राज्यपाल शासन लागू हो गया है।

इससे पहले 7 बार घाटी में राज्यपाल शासन लग चुका है। बता दें कि राज्य में सबसे पहले मार्च 1977 में राज्यपाल शासन लगा था। उस वक्त शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की सरकार को कम वोट मिले थे। कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार से समर्थन वापस लिया था।

मार्च 1986 में गुलाम मोहम्मद शाह की सरकार के अल्पमत में आने के बाद दूसरी बार राज्यपाल शासन लगा था। कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस से समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद गुलाम की सरकार गिर गई थी।

जनवरी 1990 में जगमोहन को राज्यपाल बनाने के फैसले के खिलाफ फारुख अब्दुल्ला ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सबसे लंबे समय तक, 6 साल 264 दिनों तक जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगा रहा।

अक्टूबर 2002 में त्रिशंकु विधानसभा बनने पर चौथी बार जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगा, लेकिन 15 दिन बाद ही पीडीपी-कांग्रेस ने नई सरकार बना ली।

जुलाई 2008 में जब पीडीपी ने गुलाम नबी आजाद सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिसके बाद राज्यपाल शासन लगा।

जनवरी 2015 में हुए चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। त्रिशंकु विधानसभा बनने पर जम्मू-कश्मीर में छठी बार राज्यपाल शासन लगा था।

जनवरी 2016 में मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में 7वीं बार राज्यपाल शासन लगा था।

अब बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया, जिसके बाद एक बार फिर से राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया है।

गठबंधन टूटने पर पीडीपी हैरान
पीडीपी नेता रफी अहमद मीर ने कहा कि बीजेपी के साथ गठबंधन सही चल रहा था। बीजेपी गठबंधन तोड़ेगी इस बारे में हमें जरा भी अंदाजा नहीं था। अचानक बीजेपी के उठाए इस कदम से हम हैरान हैं। यह जरूर है कि पिछले कुछ समय से घाटी और जम्मू में लोगों के बीच गैप बढ़ गया था। इस कारण अशांति का माहौल बना रहा।

उन्होंने आगे कहा कि पीडीपी और बीजेपी के नेताओं के बीच सीजफायर, अलगाववाद और पाकिस्तान जैसे मुद्दों पर जरूर अलग-अलग राय हैं, लेकिन यह गठबंधन तोड़ने की वजह नहीं हो सकती। बीजेपी जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ राजनीति फायदे का खेल कर रही है।

बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूटने की वजह के 5 कारण बताए गए है।
-रमजान में सीजफायर पर मतभेद
-ऑपरेशन ऑलआउट पर सहयोग नहीं
-पत्थरबाजों पर सख्ती नहीं हुई
-सेना के ऑपरेशन पर मतभेद
-लोकसभा चुनाव 2019 को देखते हुए पीडीपी से गठबंधन पर बीजेपी को नुकसान का खतरा

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