काम आधारित राजनीति करता हूं, जाति की नहीं: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी राजनीति की प्राथमिकता जनता की भलाई के लिए किया जाने वाला काम है। वह जातिवादी राजनीति नहीं करते। उन्होंने कहा कि वह आम लोगों के लिए सेवा भावना से काम करते हैं। सेवा की चिंता करते हैं, वोट की नहीं। बढ़िया कामों के दूरगामी अच्छे परिणाम होते हैं। इसका फायदा भविष्य में समाज के बड़े हिस्से का मिलता है। मुख्यमंत्री सोमवार को संवाद में आयोजित अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की योजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की तीन नयी योजनाओं का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका मकसद अल्पसंख्यक अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा में लाने के लिए हो रहा काम समाज का सर्वांगीण विकास करना है। इसके लिए जिस स्कीम की जरूरत होगी, वह शुरू की जायेगी। उसमें पैसे की कमी बाधा नहीं बनेगी। समाज के लोग सरकारी योजनाआें का लाभ उठाएं।

इन योजनाओं में बिहार राज्य मदरसा सुदृढ़ीकरण योजना, बिहार राज्य वक्फ विकास योजना और बिहार राज्य अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय योजना शामिल हैं। साथ ही पटना में अंजुमन इस्लामिया हॉल के पुनर्निर्माण का शिलान्यास किया। इसका काम मई, 2020 तक पूरा हो जाने की संभावना है। उन्होंने लोगों से विकास के नये प्रस्ताव देने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बतौर मुख्यमंत्री बिहार को चलाने की उनकी जवाबदेही है। आम लोगों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए सात निश्चय योजनाओं की शुरुआत की। इन्हीं योजनाओं का परिणाम है कि राज्य में बिजली की स्थिति अच्छी हुई है।

बोधगया के कार्यक्रम से लौटते समय शाम को हेलीकॉप्टर से गया शहर की चकमक देखकर हमने अपने साथ आला अधिकारियों चंचल कुमार और मनीष कुमार वर्मा को वहां का फोटो लेने का निर्देश दिया। उस शहर में बिजली की हालत किसी एक जाति और धर्म के लोगों के यहां नहीं सुधरी, बल्कि सबका विकास हुआ है। सबके लिए काम हुआ है।

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