कश्‍मीर पर UN की मानवाधिकार हनन वाली रिपोर्ट को भारत ने बताया झूठा

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भारत ने यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें जम्‍मू कश्‍मीर में मानवाधिकारों के हनन की बात कही गई है। भारत ने यूएन की इस रिपोर्ट को पूरी तरह से ‘झूठा और गलत मंशा से प्रेरित’ बताया है। यूएन की रिपोर्ट में भारत के अलावा पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) में भी मानवाधिकार हनन की बात कही गई है। रिपोर्ट में विवादित तौर पर भारत से कहा गया है, ‘कश्‍मीर की लोगों की इच्‍छा का सम्‍मान किया जाए।’

यूएन में मानवाधिकार संस्‍था के प्रमुख जैद राद अल हुसैन ने जुलाई 2016 से कश्‍मीर में हुई हत्‍याओं की जांच की मांग की है। साथ ही उन्‍होंने कहा है कि यहां पर सुरक्षाबलों के अत्‍यधिक प्रयोग और पैलेट गन का नागरिकों पर प्रयोग होने की भी जांच की जानी चाहिए। उन्‍होंने मांग की कि कश्‍मीर में भीड़ नियंत्रित करने वाले इस तरीके पर रोक लगनी चाहिए। यह पहला मौका है जब यूएन की ओर से कश्‍मीर पर इस तरह की कोई रिपोर्ट आई है। हुसैन ने कहा कि वह ह्यूमन राइट्स कांउसिल से मांग करेंगे कि कश्‍मीर में मानवाधिकार हनन के आरोपों की जांच के लिए एक कमीशन ऑफ इन्‍क्‍वॉयरी (सीओआई) हो। काउंसिल का सेशन अगले हफ्ते से शुरू होगा।

यूएन में सीओआई उच्‍च स्‍तर की जांच प्रक्रिया होती है। इसे सीरिया जैसे हालातों की जांच के लिए सुरक्षित रखा जाता है। पाकिस्‍तान की तरफ से लगातार एलओसी पर सीजफायर वॉयलेशन और हिंसा के बीच ही यूएन की यह रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएन के मुखिया ने भारत और पाकिस्‍तान दोनों के प्रतिनिधियों से जुलाई 2016 में हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद मुलाकात की थी। यूएन ने पीओके में हो रहे मानवाधिकार हनन पर कहा कि यहां पर लगातार मानवाधिकार का उल्‍लंघन हो रहा है। लेकिन साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह अलग तरह का मानवाधिकार हनन है।

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