मैंने अपने पत्नी तक को नहीं बतया की कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा :डायलॉग राइटर

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हिंदी सिनेमा में कमाई के सारे रेकॉर्ड तोड़ने वाली फिल्म बाहुबली की चर्चा इन दिनों हर तरफ है। साउथ की यह पहली ऐसी फिल्म है, जिसे हिंदी बेल्ट में इतनी बड़ी कामयाबी मिली है। साउथ पर बेस्ड कहानी से लेकर डायरेक्टर और साउथ इंडियन ऐक्टर होने के बाद भी हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने इसे भरपूर प्यार दिया। इस सफलता का क्रेडिट जाता है फिल्म के डायलॉग राइटर मनोज मुंतशिर को। हालांकि मनोज इस फिल्म का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। वह फिल्म के डायरेक्टर राजामौली को इनकार करने गए थे, लेकिन जब स्क्रिप्ट सुनी तो बिना पैसे जाने ही हां कर दी। अभी वह फिल्म का हिस्सा बनकर खुद पर गर्व महसूस कर रहे हैं। ‘बाहुबली 2’ के आने से पहले तक सब पूछ रहे थे कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? लेकिन मनोज ने यह बात अपनी पत्नी तक को नहीं बताई। अमेठी के छोटे से गांव में पले-बढ़े मनोज, फिल्म की सक्सेस सेलिब्रेट करने के लिए बुधवार को लखनऊ आए। इस मौके पर उन्होंने फिल्म से जुड़ी कई बातें हमसे शेयर कीं। अक्सर लोगों की जिंदगी में इत्तेफाक होते हैं और मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा इत्तेफाक बाहुबली से जुड़ना है। जिस वक्त मेरे पास फिल्म लिखने का ऑफर आया उस समय मैं टॉप 15 फिल्मों के गाने लिख रहा था। या यू कहूं कि उस वक्त लिरिक्स राइटिंग का मेरा गोल्डन पीरियड चल रहा था। उस वक्त मेरे पास फोन आया और मुझे बताया जाता है कि साउथ की एक फिल्म बन रही है, जिसके लिए मुझे डायलॉग लिखने थे। मैंने सोचा कि साउथ की फिल्म मैं क्यों करूं? मैंने पूछा डायरेक्टर कौन है? जवाब मिला राजामौली। मौली सर का नाम सुनकर मैं रुका। शायद ही कोई उनके साथ काम न करना चाहे, लेकिन मैंने हां नहीं किया। मुम्बई से हैदराबाद की फ्लाइट ली सोचा इसी बहाने मुझे मौली सर से मिलने का मौका मिलेगा और मैं उन्हें इनकार भी कर दूंगा। जब हमारी मुलाकात हुई, उन्होंने मुझे फिल्म की कहानी सुनाई, दस मिनट के अंदर मेरा ईमान डोल गया। दस मिनट के अंदर ही मैंने कॉन्ट्रैक्ट साइन कर दिया बिना यह जाने कि मुझे पैसे कितने मिलेंगे। दो साल पहले जब बाहुबली फिल्म आई थी चारों तरफ एक ही सवाल था कि आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? मेरे आस-पास रहने वाले, मेरे दोस्त, सोशल मीडिया पर सब जानना चाहते थे कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? मुझे भी कई लोग पूछते थे लेकिन मैंने इसका खुलासा तो अपनी बीवी तक से नहीं किया था। हालांकि, उन्होंने मुझे कभी यह सवाल पूछा भी नहीं था। अगर मैं खुलासा करता तो शायद वो बाहुबली की तलवार मेरे पेट में ही होती। जिस वक्त मैंने यह फिल्म साइन की थी मैंने तय कर लिया था कि मुझे ट्रांसलेशन की तरफ तो जाना ही नहीं है। ऐसा नहीं कि अभी तक साउथ में अच्छी फिल्में नहीं बनीं, रजनीकांत, चिरंजीवी, वेंकटेश जैसे बड़े कलाकारों की फिल्में आती रही हैं, लेकिन साउथ की फिल्मों को हमेशा डब करके रिलीज किया गया है। मैं यहां पर थोड़ा क्रेडिट खुद को देता हूं कि मैंने पहले वाली गलती नहीं की। मैंने ट्रांसलेशन नहीं, बल्कि फिल्म के सीन समझकर डायलॉग को ट्रांसक्रिएट किया। डायलॉग और लिप में तालमेल था और यही वजह थी कि हिंदी बेल्ट को यह लगा ही नहीं कि यह हमारी फिल्म नहीं है। अब तो मेरे पास साउथ से इतने ऑफर्स आ रहे हैं कि लग रहा है कि पूरी इंडस्ट्री ही मेरे पास आ रही है। हालांकि, मैं तो बस बाहुबली जैसी ही किसी फिल्म के इंतजार में हूं। जहां तक सवाल प्रमोशन का है तो छोटी से छोटी फिल्म का बजट भी सात से आठ करोड़ होता है। हर फिल्म के बजट का दस फीसदी प्रमोशन का बजट होता। हमारी फिल्म तीन सौ करोड़ की है, लेकिन इसके प्रमोशन का बजट था तीन करोड़। हम लोग किसी शो पर नहीं गए, कहीं नाचे कूदे नहीं।

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