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मप्र में कुपोषण गंभीर चुनौती

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राष्ट्रीय उजाला संवाददाता
भोपाल।महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने माना कि मप्र में कुपोषण गंभीर चुनौती बन गया है। राजधानी के समन्वय भवन में कल पोषण के लिए कृषि और पोषण जागरूकता विषय पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि प्रदेश में 100 में से 43 बच्चे कम वजन के हैं और 85 प्रतिशत लड़कियां एनीमिया से प्रभावित हैं। इस हालत से सिर्फ दलिया के भरोसे नहीं निपटा जा सकता। सभी के सहयोग की जरूरत है।
चिटनिस ने कहा कि यह विरोधाभास है कि हम सोयाबीन, चना और दलहन उत्पादन में तो आगे हैं लेकिन हमारी महिलाएं और बच्चे कुपोषित हैं। अब प्रदेश के हर विकासखण्ड में एक पोषण स्मार्ट गांव विकसित किया जाएगा। इसमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक तत्वों के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही उनके सही उपयोग के संबंध में जानकारी दी जायेगी।

जानकारी देनी होगी
कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने नमामि देवी नर्मदे यात्रा के जरिये नर्मदा नदी के दोनों ओर फलदार वृक्ष लगाने के अभियान को पोषण की दृष्टि से भी बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर पोषण युक्त भोजन के बारे में लगातार जानकारी उपलब्ध कराना होगा।

कुपोषण खत्म करने के लिए अंडे जरूरी
राज्य आजीविका मिशन के सीईओ एलएम बेलवाल ने कार्यशाला में कहा कि कुपोषण खत्म करने के लिए अंडे जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने बच्चों को अंडे और हरी सब्जियां खिलाना नहीं सिखा पाते हैं, यह हमारी कमजोरी है। अंडा, दूध और हरी सब्जियों से कुपोषण खत्म हो सकता है। गौरतलब है कि मिड डे मील योजना के तहत मप्र सरकार ने बच्चों को अंडे नहीं देने का फैसला किया था।
आयोजित कार्यशाला में अर्चना चिटनिस ने कहा कि प्रदेश में 100 में से 43 बच्चे कम वजन के हैं और 85 प्रतिशत लड़कियां एनीमिया से प्रभावित हैं। इस हालत से सिर्फ दलिया के भरोसे नहीं निपटा जा सकता। सभी के सहयोग की जरूरत है।

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