भ्रष्टाचार हटाने लोकायुक्त से उठा भरोसा।

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ग्वालियर। भ्रष्टाचार के मामलों में ढुलमुल रवैए के चलते लोगों का लोकायुक्त पर से भरोसा उठता जा रहा है। साल की पहली तिमाही में लोकायुक्त में दर्ज मामले भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। इस साल पहली तिमाही में लोकायुक्त में दर्ज प्रकरणों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 25 फीसदी की कमी आई है। ये हालत सिर्फ ग्वालियर-चंबल जोन की ही नहीं है भोपाल- सागर, जबलपुर व इंदौर के भी हैं। लोग अब लोकायुक्त में शिकायत करने की बजाए सोशल मीडिया में रिश्वत लेने वालों के आॅडियो और वीडियो डाल कर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

62 लोगों को रिश्वत लेते हुए ट्रेप किया था
2016 में ग्वालियर-चंबल संभाग में लोकायुक्त ने करीब 62 अधिकारियों व कर्मचारियों को ट्रेप किया था। लेकिन 2017 की पहली तिमाही में लोकायुक्त केवल 6 लोगों को ट्रेप कर पाई है। जबकि पिछले साल इस अवधी में ट्रेप का आंकड़ा लगभग 15 था।

नियम आसान बनाए फिर भी नहीं बढ़े प्रकरण
पिछले छह महीने से लोकायुक्त ने नियमों में शिथिलता बरती है। पहले लोकायुक्त अपना रिकॉर्डर देकर फरयादी को आवाज टेप करने के लिए भेजती थी। कई बार शातिर अधिकारी व कर्मचारी समझ जाते थे और लेन-देन की बात ही नहीं करते थे। इसलिए कई प्रकरणों में ट्रेप की कार्रवाई फेल हो जाती थी। लेकिन लोकायुक्त अब निजी मोबाइल पर की गई आॅडियो व वीडियो रिकॉर्डिंग पर भी प्रकरण दर्ज करने लगी है।

सिर्फ फरियादी को इस बात का शपथ-पत्र देना होगा कि यह आवाज उसी अधिकारी व कर्मचारी की है जिसके खिलाफ उसने किसी सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने की लिखित शिकायत की है। इस सुविधा से लोकायुक्त में ट्रेप के मामले बढ़ने चाहिए। लेकिन उल्टा हुआ है।

आने वाले दिनों में बढ़ेंगीं शिकायतें
ये बात सही है कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष की पहली तिमाही में कम मामले ट्रेप हुए हैं। लेकिन पहली तिमाही में कोई आकलन करना गलत है। उम्मीद है कि साल के अंत तक पिछले साल की तुलना में ट्रेप के प्रकरण अधिक होंगे। – अमित सिंह, एसपी लोकायुक्त (ग्वालियर-चंबल संभाग जोन)लोग अब लोकायुक्त में शिकायत करने की बजाए सोशल मीडिया में रिश्वत लेने वालों के आॅडियो और वीडियो डाल कर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

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