बिंदास अंदाज से छा गई वीरे दी वेडिंग की चारों बेबाक सहेलियां

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चार महिला दोस्तों की कहानी कहती हुई ‘वीरे दी वेडिंग’ फिल्म आज बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हो गई है। वीरे दी वेडिंग की कहानी ऐसी चार महिला दोस्तों की कहानी है, जो शराब पीती हैं, सिगरेट पीती हैं, शादी से पहले सेक्स को बुरा नहीं मानतीं और न ही गाली देने से परहेज करती हैं। चारों का ही बिदांस अंदाज है, जो अपनी शर्तों पर जीना चाहती हैं। चारों दोस्त कालिंदी (करीना कपूर) की शादी पर मिलती हैं। कालिंदी कमिटमेंट करने से डरती है, लेकिन वो ऋषभ (सुमीत व्यास) से प्यार करती है इसलिए वो ऋषभ से शादी कर रही है। वहीं कालिंदी की दोस्तों की बात करें तो साक्षी सोनी (स्वरा भास्कर) जल्दीबाज़ी में की गई अपनी शादी से छुटकारा चाहती है वह अपने पति से तलाक चाहती है। अवनी (सोनम कपूर) को शादी के लिए लड़के नहीं मिल रहे हैं और उसकी मां उसकी शादी के लिए उसपर दबाव बना रही है। मीरा(शिखा) ने अपने परिवार के मर्जी के खिलाफ शादी की है जिसका उसे भी दुख है।

शशांक घोष के निर्देशन में बनी ये फिल्म आज के समय के बिलकुल अनुरूप है। आज के समय में जिस तरह से लड़कियां अपनी मर्जी के रिश्ते चाहती हैं और वो सभी काम करती हैं, जो लड़कों के लिए बुरे नहीं मानें जाते। शशांक ने आज के परिप्रेक्ष्य को देखते हुए बेहद शानदार तरीके से फिल्म की कहानी को पर्दे पर उतारा है। फिल्म का पहला हाफ काफी इंटरेस्टिंग है, लेकिन दूसरा हाफ थोड़ा खिंचा हुआ लगता है। फिल्म का क्लाइमेक्स भी उतना बेहतर नहीं रहा है, जितना होना चाहिए था।

अभिनय की बात करें तो सभी किरदारों की एक्टिंग अच्छी है। करीना कपूर ने अपने बेहतरीन काम परिचय देते हुए एक बार अपने आपको साबित किया है। वहीं, बात करें सोनम कपूर की तो उन्होंने अपने किरदार को उम्दा तरीके दर्शकों के सामने पेश किया है। उनके किरदार में चुलबुलापन साफ दिखाई देता है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे चार दोस्त मिलकर अपनी अपनी कमियों पर डील पाने की कोशिश करतीं हैं। उनकी आपस की केमिस्ट्री शानदार है। फ़िल्म के दूसरे किरदारों ने भी उनका बखूबी साथ दिया है।

फिल्म के संगीत की बात करें तो संगीत कहानी के अनुरूप है। सिनेमेटोग्राफी बेहतरीन हैं जो फ़िल्म के लुक को बहुत खूबरसूरत बनाती है। फ़िल्म के वन लाइनर्स हंसाते हैं। फिल्म के डायलॉग्स बोल्डनेस से भरपूर है। अब तक की फिल्मों में नायिका का जो रूप दिखाया जाता है, वीरे दी वेडिंग उस रूप पर प्रहार करती है। इस फिल्म में दिखाने की कोशिश की गई है कि जब पुरूण अपनी इच्छाओं को जगजाहिर कर सकते हैं, बिना किसी रोक टोक के तो महिलाएं क्यों नहीं?

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