RBI ने लिया होम-ऑटो लोन की ब्याज दरों में कोई बदलाव ना करने का निर्णय

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केन्द्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है लेकिन होम लोन को लेकर आरबीआई ने बड़ा फैसला किया है। सोमवार से शुरू हुई आरबीआई की बैठक ने अपना फैसला सुना दिया है। बैठक में ब्याज दरों में कोई भी बदलाव नहीं करने का फैसला हुआ है। बैंक द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि रेपो रेट रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार रहेगा।

इस वर्ष की 5वीं मौद्रिक समीक्षा के बाद एमपीसी ने रिवर्स रीपो रेट और बैंक रेट भी क्रमश: 6.25 प्रतिशत और 6.75 प्रतिशत पर कायम रखा। इस बार एमपीसी की बैठक सोमवार, 3 दिसंबर को शुरू हुई थी। इसके अलावा, आरबीआई की एमपीसी ने डिजिटल ट्रांजैक्शन के रफ्तार पकडऩे के मद्देनजर डिजिटल ट्रांजैक्शन की निगहबानी के लिए एक कानूनी संस्था बनाने का फैसला किया। कमिटी ने कहा कि जनवरी के आखिर में इसका नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।

वहीं, रिवर्स रेपो रेट 6.25 फीसदी पर रहेगा। आरबीआई ने होम, ऑटो और पर्सनल लोन को लेकर बड़ा फैसला किया है। अब आरबीआई के फैसला करते ही बैंकों को भी इस पर फैसला लेना होगा। अगर आसान शब्दों में समझे तो आरबीआई के दरें घटते ही बैंक आपकी ईएमआई घटा देंगे।

जून से आरबीआई ने ब्याज दरों में लगातार दो बार बढ़ोतरी की थी। उसके बाद अक्टूबर में अर्थशास्त्रियों के अनुमान के विपरीत रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरों को उसी स्थिति पर बरकरार रखा। रुपये में गिरावट तथा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से मुद्रास्फीति दबाव के चलते उम्मीद की जा रही थी कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करेगा। उस समय रेपो दर को 6.50 फीसदी पर कायम रखा गया था।

आरबीआई ने अपेक्षा के मुताबिक रीपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने तीन दिवसीय समीक्षा बैठक में रीपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ की दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) के दौरान मंहगाई दर 2.7 से 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

दरअसल, पिछली मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है और 70 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के भाव भी नरम हुए और 86 डॉलर प्रति बैरल से नीचे 60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। हालांकि, आर्थिक वृद्धि दर सितंबर तिमाही में नरम होकर 7.1 प्रतिशत रही। इससे पूर्व पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में यह दो साल के उच्च स्तर 8.2 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। फल, सब्जी और अंडा, मछली जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों के सस्ता होने से खुदरा मुद्रास्फीति भी अक्टूबर महीने में 3.31 प्रतिशत रही जो एक महीने का न्यूनतम स्तर है।

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