हरियाणा में चल रहे हजारों फर्जी स्कूलों के प्रति हाईकोर्ट का सख्त रुख

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हरियाणा भर में चल रहे हजारों फर्जी स्कूलों के मामले में आज बुधवार को हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय में चल रहे मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान इस मामले में हरियाणा सरकार को भी करारा झटका लगा, वहीं न्यायालय ने कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के प्रति अपने सख्त रुख को भी साफ कर दिया।

वहीं याचिकाकर्ता स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन की तरफ से भी उच्च न्यायालय में 175 पेज का शपथ पत्र देकर कहा कि अगर जांच कराई जाए तो प्रदेशभर में गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की संख्या करीबन चार हजार पाई जाएगी। इससे पहले न्यायालय ने 25 जुलाई को हुई सुनवाई में हरियाणा सरकार की तरफ से एक शपथ पत्र देकर प्रदेश भर में गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की संख्या 1087 बताई थी।

इस पर याचिकाकर्ता संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने आपत्ति जताते हुए न्यायालय में सरकार द्वारा पेश आंकड़ों को भ्रमित किए जाने वाला करार देते हुए कहा कि अगर जांच कराई जाए तो प्रदेशभर में गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या पाएगी। इसके लिए संगठन ने 12 सितम्बर को सुनवाई के दौरान शपथ पत्र देने की भी बात कही थी। बुधवार को उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अख्तियार करते हुए संगठन द्वारा अब तक इस मामले में सरकार द्वारा गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर कार्रवाई किए जाने के नाम पर की गई लीपापोती के तथ्य सामने रखे।

जिस पर न्यायालय ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए अब तक गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ की गई कार्रवाई के सम्बंध में स्टेटस रिपोर्ट 12 नवम्बर 2018 तक न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने के आदेश दिए। गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को सील लगाए जाने के मामले में न्यायालय में चुनौति देने पहुंचे भिवानी जिले के दो निजी स्कूलों को भी न्यायालय ने करारा जवाब दिया। इन दोनों ही गैर मान्यता निजी स्कूलों पर सील हटाए जाने की याचिका को न्यायालय ने सिरे से खारिज कर दिया और इसके साथ फटकार भी लगाई कि आपके पास स्कूल संचालन संबंधी जब कोई अनुमति या फिर मान्यता ही नहीं है तो न्यायालय में फिर क्या सोचकर पहुंचे।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार व महामंत्री भारत भूषण बंसल ने बताया कि अब तक गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को बंद कराने में कोताही बरतने वाले शिक्षा एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ उन स्कूलों के प्रबंधकों के खिलाफ भी न्यायालय की अवमानना पर केस दर्ज कराए जांएगे।

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