कर्नाटक: एचआईवी पीड़िता ने झील में डूबकर दी जान, लोगों ने निकलवा दिया सारा पानी

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कर्नाटक के धारवाड जिले के मोराब गांव में लोगों ने 36 एकड़ बड़ी झील से पानी पीना बंद कर दिया है। जिद पर अड़े लोगों के कारण प्रशासन को झील से पंप के जरिये पानी निकालना पड़ रहा है। लोगों की इस जिद का कारण है झील में एक एचआईवी पीड़िता का कूदकर आत्महत्या कर लेना। महिला की लाश मिलने के बाद से ग्रामीणों ने झील का पानी पीने से इनकार कर दिया है। लोगों को डर है कि एचआईवी पीड़िता का संक्रमण पानी में मिल गया है, जिससे ये बाकी लोगों में भी फैल सकता है।

हुबली जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर मोराब गांव में एचआईवी पीड़िता के झील में कूदकर आत्महत्या कर लेने के बाद से हड़कंप मच गया है। करीब 25 फुटबॉल मैदानों के बराबर ये झील गांव के लोगों के लिए पानी का एकमात्र जरिया है, लेकिन अब लोगों ने यहां से पानी पीना बंद कर दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक लोगों को एचआईवी संक्रमण और बीमारी का डर है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन गांववाले उनकी बात मानने को राजी ही नहीं है।

धारवड जिले के स्वास्थ्य ऑफिसर डॉ. राजेंद्र डोड्डामणी ने इस स्थिति पर कहा, ‘ये दुर्भाग्यपूर्ण है। हम लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि एचआईवी पानी के जरिए नहीं फैलता, लेकिन लोग समझ नहीं रहे। इसलिए हमने पानी को झील से निकाना शुरू कर दिया है।’ महिला की लाश झील से 29 नवंबर को निकाली गई थी और तभी से गांववालों में पानी को लेकर डर बना हुआ है। प्रशासन ने पानी पीने लायक है या नहीं, इसके लिए जांच का प्रस्ताव भी रखा लेकिन ग्रामीण तब भी नहीं मान रहे। गांववाले अभी रोजाना 2-3 किलोमीटर दूर जाकर पानी लेकर आ रहे हैं।

आखिर में प्रशासन अब कई ट्यूबों के जरिए पानी निकाल रहा है। इस काम में करीब 50 लोग लगे हुए हैं। झील से पानी नितालने के बाज इसमें मालाप्रभा कनाल से पानी लाकर भरा जाएगा। एचआईवी पीड़ितों का इलाज कराने वाले आशा फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. ग्लोरी एलेक्जेंडर के अनुसार एचआईवी पानी के जरिये नहीं फैलता। ‘जब एक एचआईवी पीड़ित की मौत होती है तो वायरस भी मर जाता है। अगर वायरस शरीर से बाहर आता भी है, तो वो पानी में जिंदा नहीं रह सकता और कुछ ही सेकेंड्स में मर जाता है। पानी से संक्रमण फैलने का कोई खतरा नहीं होता।’

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