ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सांसद वैष्णव चरण पारिदा का 77 साल की उम्र में निधन

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ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सांसद , लेखक और एक सामाजिक कार्यकर्ता वैष्णव चरण पारिदा गुरुवार को भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गए है। वैष्णव चरण पारिदा 77 वर्ष के थे। पारिदा लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। उनका काफी दिनों से एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। वह एक प्रसिद्ध राजनेता, स्तंभकार और एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। उड़ीसा आधिकारिक भाषा अधिनियम, 1954 ने अहम भूमिका निभाई थी।

पारिदा का जन्म 1941 में ओडिशा के जजपुर जिले में हुआ था। उनके पिता जगबन्धु पारिदा कोलकाता की जूट मिल में एक कर्मचारी और एक लोक गायक थे। उनकी मां सुलोचना पारिदा एक गृहिणी थीं। उनकी प्रारंभिक स्कूल शिक्षा मंगलपुर प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। मैट्रिक के बाद, वह उच्च अध्ययन के लिए कोलकाता चले गए क्योंकि उनके पिता वहां काम करते थे। उन्होंने कोलकाता में बंगाबासी कॉलेज से स्नातक और कोलकाता विश्वविद्यालय से एमए इन पॉलिटिकल साइंस की उपाधि प्राप्त की।

बाद में उन्होंने मॉस्को विश्वविद्यालय से एम.फिल पूरा किया। वह 1960 से 1992 तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सदस्य रहे। 1993 में मार्क्सवादी विचारधारा से कुछ मतभेदों के चलते उन्होंने सीपीआई को छोड़ दिया। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। 1 998 तक वह कांग्रेस में रहे लेकिन तत्कालीन पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेदों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दिया। इसके बाद 1999 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। पार्टी ने उन्हें राज्य का अध्यक्ष बना दिया।

2008 में उन्होंने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ दिया और बीजेडी में शामिल हो गए। इसके बाद वे 2010 में बीजेडी से राज्यसभा सांसद चुने गए। वह 2016 तक राज्यसभा के सांसद रहे।

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