प्रदूषण पर चर्चा के लिए बैठक में नहीं इन आए राज्यों के मंत्री, हर्षवर्धन ने जताई नाराजगी

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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केन्द्रीय पर्यावरण की तरफ से गुरुवार को बुलाई गई सभी संबद्ध राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में दिल्ली के अलावा किसी भी अन्य राज्य के मंत्री नहीं पहुंचे। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के मंत्रियों के बैठक में नहीं आने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि वह राज्य सरकारों से इस बारे में बात करेंगे।

बैठक के बाद डॉ. हर्षवर्धन ने संवादाताओं को बताया कि बैठक में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन के अलावा दिल्ली के मुख्य सचिव और पर्यावरण सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। वहीं पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के पर्यावरण मंत्री बैठक में नहीं आए।

प्रदूषण की लगातार गहराती समस्या के बावजूद इस मामले में राज्य सरकारों की संवेदनहीनता के सवाल पर डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि बैठक के दौरान मैंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से बात करने की कोशिश की, लेकिन शायद विदेश में होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी। मैं इस विषय पर राज्य सरकारों से बात करूंगा।

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने एनसीआर के पांच शहरों दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद में हवा की लगातार खराब हो रही गुणवत्ता के मद्देनजर संबद्ध राज्य सरकारों के साझा प्रयासों की समीक्षा के लिए गुरुवार को पर्यावरण मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। बैठक में मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के अलावा शेष राज्यों की पर्यावरण नियंत्रण समितियों के इंजीनियर स्तर के अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। सूत्रों के अनुसार डॉ. हर्षवर्धन ने राज्यों के इस रवैये पर बैठक के दौरान नाराजगी व्यक्त की।

न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, उन्होंने बताया कि पांचों शहरों में वायु प्रदूषण संबंधी मानकों के पालन की निगरानी के लिए मंत्रालय द्वारा गठित 41 निगरानी टीमों के गत 15 सितंबर से जारी अभियान की रिपोर्ट में किसी भी शहर का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। इन शहरों में समस्या और उसके कारणों को दूर करने के उपायों एवं प्रदूषण मानकों के पालन की दर बेहद कम दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, मानकों के पालन की दर नोएडा में 7.36 प्रतिशत, फरीदाबाद में 5.01 प्रतिशत, दिल्ली में 4.06 प्रतिशत, गाजियाबाद में 3.70 प्रतिशत और गुरुग्राम में 3.93 प्रतिशत दर्ज की गई। उन्होंने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की शिकायतों में भी 25 अक्टूबर तक 30 प्रतिशत तक की गिरावट को नाकाफी बताते हुए कहा कि हमें इतने मात्र से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

बैठक के बाद डॉ. हर्षवर्धन ने अगले दस दिन तक इन पांच शहरों में चलने वाले स्वच्छ वायु अभियान को हरी झंडी दिखाई। इसके तहत केन्द्र और सभी पांच राज्य सरकार के संबद्ध विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी वाले 52 निगरानी दल लगातार पांच शहरों में प्रदूषण मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगम के अधिकारियों के 70 दल दिल्ली में अलग से निगरानी अभियान चलाएंगे। इन दलों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले को पहले नोटिस दिया जाए। दो दिन तक इसका पालन नहीं करने पर चेतावनी नोटिस और इसके दो दिन बाद भी पालन सुनिश्चित नहीं होने पर उल्लंघनकर्ता और संबद्ध जिम्मेदारी एजेंसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की कार्रवाई शुरू की जाए।

दिल्ली में खराब वायु गुणवत्ता की वजह से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने अस्थमा को लेकर एक नियमावली जारी की है। इस पुस्तिका में यह बताया गया है कि स्कूल प्रशासन आपातकाल की स्थिति में क्या उपाय अपना सकता है। इस पुस्तिका में बच्चों में अस्थमा की पहचान की जानकारी और बच्चों को सुरक्षित और सकारात्मक माहौल देने की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था की जानकारी दी गई है। डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि यह पुस्तिका स्कूल के प्रशासन को बच्चों को सांस लेने में शिकायत की आपात स्थिति से निपटने में मदद करेगी।

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