पीएम नरेंद्र मोदी का ब्रह्मास्त्र

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pm-narendraनिर्मलेंदु
कार्यकारी संपादक,
दैनिक राष्ट्रीय उजाला
एक अभूतपूर्व, अतुलनीय , अद्भुत, अकल्पनीय, अस्वाभाविक, अविस्मरणी, अकटय फैसला
पीएम नरेंद्र मोदी का ब्रह्मास्त्र
मोदी का सत्यम, शिवम, सुंदरम निर्णय
छिटपुट घटनाएं घटीं, कहीं शादी रुक गई, तो कहीं रेलवे स्टेशन में पानी के के लिए खुले पैसे न होने के कारण लोगों को प्यासा रहना पड़ा, तो कहीं जिस व्यक्ति ने जीवन में कभी भी उधार नहीं लिया, उसे भी उधार लेना पड़ा, तो कहीं पेट्रोल पम्प में खुले न होने के कारण झगड़ा हो गया, तो कहीं अस्पताल में बिल न भर पाने के कारण बीमार व्यक्ति को घर नहीं ले जा सके, लेकिन बावजूद इसके लोगों ने मोदी के इस फैसले का तहेदिल से स्वागत किया। यह एक अभूतपूर्व, अतुलनीय , अद्भुत, अकल्पनीय, अस्वाभाविक, अविस्मरणी, अकटय फैसला था। इस फैसले के लिए नरेंद्र मोदी को 100 प्रतिशत मार्क्स मिल गये। अगले चुनाव के लिए उन्होंने अपना रास्ता तय कर लिया है। अब मोदी मिशन रूपी यह रथ कोई नहीं रोक सकता। तुलसीदास ने कहा है कि जहां सुमति तंह सम्पति नाना, जहां कुमति तंह बिपति निधाना। हम सब ब्रह्मास्त्र के बारे में केवल सुन चुके हैं, आज हमने देख लिया। मोदी का ब्रह्मास्त्र। एक ही वार में किला फतह। समय बदल रहा है और इसके साथ ही साथ हमारे शासक भी मजबूत होते जा रहे हैं। यह दृÞढ़ संकल्प की देन है। भारत एक विशाल प्रजातंत्र है और हम उस बगिया के फूल और बागबां बने हैं हमारे पीएम नरेंद्र मोदी। आप सब सोच रहे हैं कि क्या है ब्रह्मस्त्र और इसकी मारक क्षमता। बस यही है मोदी की मारक क्षमता। पूरे देश में खलबली मची हुई है। साधारण लोग खुश हैं। नौकरीपेशा वालों को दिक्कतें हो रही हैं, लेकिन साथ ही वह इसे मोदी का एक ऐतिहासिक मास्टर स्ट्रोक कह रहे हैं। विरोधियों की बोलती बंद हो गई है। सभी राजनीतिक दलों के सामने मोदी का यह स्ट्रोक एक ब्रह्मास्त्र के रूप में सामने आया है। अगले साल यूपी का चुनाव है। उससे पहले ही पीएम मोदी ने ट्रम्प का इक्का फेंका। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि अपने लक्ष्य के लिए तब तक तत्पर रहो, जब तक वह लक्ष्य तुम्हें प्राप्त ना हो जाए। मोदी इस मामले में निपुण हैं। छह महीने पहले इस मिशन की शुरुआत कर चुके थे, शायद उसी मिशन को वह खाते पीते थे। उन्होंने लोगों को वक्त दिया था कि काला धन जमा करो, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। जिन्होंने सुनी, वे आज टैक्स चुका कर मजे उड़ा रहे हैं। मोदी के उस फैसला का रिजल्ट अब आया। खूब आया। चाणक्य का सबसे बड़ा गुरु मंत्र यही है कि कभी भी अपने राज दूसरों को मत बताएं। यह आपको बर्बाद कर देगा। बस पीएम मोदी की यही सबसे बड़ी उपलब्धि रही। राज किसी को नहीं बताया। केवल छह लोगों ने इस काम को अंजाम दे दिया। अखबार और चैनल वाले हमेशा यही दम्भ भरते रहते हैं कि यह एक्सक्लूसिव न्यूज है। केवल हमारे पास है। लेकिन इस बार सभी बड़े बड़े पत्रकार फेल हो गये। पीएम मोदी की यह राजनीतिक चाल समझने में सभी पत्रकार नाकामयाब रहे। स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलकर मोदी यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा है, जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो। उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो। मोदी ने दिखा दिया कि सचमुच उनकी छाती 56 इंच की है। उनके आगे पीछे कोई नहीं। वह देश के लिए बिना किसी के परवाह किये कोई भी ठोस और सख्त निर्णय ले सकते हैं, क्योंकि वह एक ईमानदार, कर्मठ, डेडिकेटेड और निर्लोभी व्यक्ति हैं। हमें गर्व करना चाहिए कि हमें ऐसे पीएम मिले हैं। मैंने एक कहावत लिखी है — जो कर्मठ, डेडिकेटेड, ईमानदार और निर्लोभी होते हैं, ब्रह्मा, बिष्णु, महेश भी उनसे डरते हैं, तो आम आदमी की क्या औकात है। ब्रह्मा, बिष्णु, महेश भी उनकी राह में नहीं आते। वे एक दूसरे से इशारे से कहते हैं कि जाने दे, जो चाहे करने दे, नहीं तो जनता हमें माफी नहीहं करेगी। पीएम मोदी ने सख्त कदम उठाये और इसी वजह से आज मोदी की हर जगह जय जयकार हो रही है। सत्यम, शिवम, सुंदरम है मोदी का यह निर्णय। उन्होंने यह निर्णय लेकर यह साबित कर दिया कि हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव और संकल्प होता है, और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति और संकल्न शक्ति अधिक बलवती होती है। सच तो यही है कि दृढ़ इच्छा शक्ति के बिना इतना बड़ा कदम उठाना किसी भी व्यक्ति विशेष के लिए संभव नहीं था। पीएम मोदी जब बोलते हैं कि हमें करना है और करके दिखा देना है, तो उनकी आवाज में एक शक्ति दिखती है, एक संकल्प दिखती है, एक सच्चाई दिखती है, एक ईमानदारी दिखती, एक जज्बा दिखता है, एक जुनून दिखता है। एक महापुरुष की वाणी झलकती है।
दरअसल, उन्हें पता है कि हम सभी मरेंगे – साधु या असाधु, धनी या दरिद्र- बेईमान या ईमानदार – सभी मरेंगे। चिर काल तक किसी का शरीर नहीं रहेगा। अतएव उनकी अंतरात्मा ने उन्हें कहा होगा कि उठो, जागो और संपूर्ण रूप से निष्कपट हो जाओ। दुष्टों का दमन करो, और शिष्टों को सही स्थान पर बैठाओ। भारत में घोर कपट समा गया है। ऐसे में चाहिए चरित्र, चाहिए इस तरह की दृढ़ता और चरित्र का बल, जिससे मनुष्य आजीवन दृढ़व्रत बन सके। और हमें लगता है कि ये सारे गुण मोदी में हैं, शायद इसीलिए वे निडर और बिना कोई द्विधाबोध के यह निर्णय ले पाये।
गुरु नानक ने कहा था
कर्म भूमि पर फल के लिए श्रम सबको करना पड़ता है
रब सिर्फ़ लकीरें देता है रंग हमको भरना पड़ता है।
जी हां, पीएम मोदी ने अपने हाथ में लिखी लकीरों में रंग भर दिया है। दरअसल, निष्काम कर्म, ज्ञान से श्रेष्ठ है और सरल भी। कोई भी व्यक्ति क्षण भर के लिए भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता। प्रकृति के स्वाभाविक गुणों से विवश होकर प्रत्येक को कुछ न कुछ कर्म करना ही पड़ता है। जीवन के रहते हुए कर्म से बचना असंभव है। हम सब यह जानते हैं कि मुट्ठीभर संकल्पवान लोग, जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं। संकल्प लिया, और करके दिखाया। हां, ऐसे लोगों में शुमार हो गये हैं पीएम नरेंद्र मोदी। उन्होंने इतिहास की धारा को बदल दिया है। एक ऐतिहासिक निर्णय लेकर। जीवन में दो ही व्यक्ति असफल होते हैं। पहले, वे जो सोचते हैं पर करते नहीं, दूसरे वे जो करते हैं पर सोचते नहीं। लेकिन मोदी मोचते भी है, कहते भी हैं और करके दिखा भी देते हैं। यही नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी शक्ति है। दरअसल, ईमानदार व्यक्ति का जब ईमानदारी का घड़ा फूटता है, तो वह भारत के पीएम बन जाते हैं और जब बेईमान व्यक्ति का घड़ा फूटता है, तो वह आशाराम बापू बन जाता है। यही फर्क है ईमानदारी और बेईमानी में।

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