त्राही त्राही मची हुई है, जनता की सुनें, जनता कह रही है….

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modi-goaनिर्मलेंदु
कार्यकारी संपादक,
राष्ट्रीय उजाला संवाददाता
एक खुला पत्र
आदरणीय मोदी जी
प्रणाम
त्राही त्राही मची हुई है, जनता की सुनें, जनता कह रही है
हमसे का भूल हुई, हमका सजा ऐसन मिली
गलती मिले, तो सजा दें देशवादी। पी एम मोदी ने कहा मुझे 50 दिन दें। गोवा में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में देशवासियों से मोदी ने कहा कि मैं कुर्सी के लिए पैदा नहीं हुआ। मोदी ने कहा कि मैंने काम ईमानदारी से किया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बनी है यह सरकार। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि मैंने किन लोगों से लड़ाई मोल ली है, वे चाहें तो मुझे जिंदा जला दें, मैं डरने वाला नहीं।
चलिए मोदी जी, देश को भ्रष्टाचार पर जो बड़ा आॅपरेशन चाहिए था, वह हो ही गया। इसमें कोई दो राय नहीं कि भ्रष्टाचार पर इस तरह से प्रहार मोदी जी आप ही कर सकते थे। देश को यकायक भौचक्का कर देना आपको बखूबी आता है। आपने एक ही रात में पूरे देश को चौंका दिया। लेकिन जो मुसीबतें सामने दिख रही हैं, उससे हम कैसे निपटेंगे? अब तो आपने खाते से हफ्ते में 24 हजार निकालने की छूट भी दे दी, लेकिन क्या इस छूट से जो जानें गई हैं, वे लौट पाएंगे। जिन लोगों ने अपने परिवार के लोगों को खोया है, वे वापस आएंगे। क्या उन्हें भी मुवाअजा मिले, जैसा कि शहीदों को मिलता है। ये भी तो एक आंदोलन के शिकार हुए हैं। जिन लोगों के घर में शादी नहीं हो पाई, क्या वे दोबारा तुरंत शादी कर पाएंगे। एक परिवार में 16 नवंबर को शादी होनी थी, अब वह शादी कब होगी, यह कहना मुश्किल है। सहारनपुर में होटल में 500 रुपये न लेने पर तोड़फोड़ हो गई। पैसे न मिलने पर जगह-जगह पुतले फूंके गये, तोड़ फोड़ हुई। नदी पार कर कुछ इलाके में लोग शहर में आये नोट कैश करने, लेकिन कहीं एटीएम बंद मिले, तो कहीं लाइन लंबी होने के कारण उन्हें काउंटर तक पहुंचने में शाम के 6 बजे गये। सड़क से संसद तक बवाल, विरोध, प्रदर्शन, हिंसा और वाद विवाद जारी।
बाबूरपुरवा क्षेत्र के मुंशीपुरवा निवासी एक व्यापारी की बेटी का निकाह इलाहाबाद के अहल्दाबाद निवासी युवक से तय हुआ था। शादी हुई, लेकिन शादी के तुरंत बाद तलाक हो गया। दूल्हे ने पुराने नोट दिये, तो बना बना लिये गये बंधक। शादी टूट गई। अदालत तक पहुंचे दोनों पक्ष। ज्यादातर एटीएम काम नहीं कर रहे। सब्जियां महंगी हो गर्इं, तो कहीं कहीं पर आवक ठप होे गया। दिल्ली के दो जगह पर भगदड़ मच गई। कहीं पर छुट्टा नहीं मिलने के कारण तरस गये लोग। एक मां अपनी दो साल की बच्ची के लिए दूध तक नहीं खरीद पाई, क्योंकि उनके पास 500 का नोट था। छुट्टा नहीं मिला। ऊपर से दो हजार का नोट। आप 2000 रुपये देकर चार सौ रुपये, या छह सौ रुपये या 800 रुपये का सामान ले लें, आपको छुट्टा नहीं मिलेगा। तरस जाएंगे छुट्टे के लिस आप। मोदी जी आप भी लाइन लगाएं, तो पता चलेगे कि गरीबी क्या होती है? आदेश पास करना और उसे अमली जामा पहनाने में कितनी दिक्कतें आती हैं। एसी रूम बैठे बैठे आप आदेश देते हैं, तो वहीं उस आदेश का पालने करने में हम जैसे लोगों को दिन में ही जारे नजर आने लगते हैं। व्यवस्था किये बिना सर्जिकल स्ट्राइक करना समझदारी नहीं है। आपने नि:संदेह यह अच्छा काम किया है, लेकिन व्यवस्था नहीं की। और इसी फैसले के कारण जनता परेशान हो रही है, त्राही त्राही मची हुई है। पुलिसवाले अलग से परेशान करते हैं, बैंक वाले ऐसे पेश आ रहे हैं, जैसे कि लोगों ने गलती की है, बैंक में पैसे रख कर। दिहाड़ी मजदूरों की दिहाड़ी खत्म। लाइन लगाएं, कि मजदूरी करें? शादी नहीं होने पर एक पिता ने सवाल किया कि 20 हजार रुपये में वह दो बच्ची की शादी कैसे करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे में आत्महत्या करने के अलावा और कोई चारा नहीं। मुरादाबाद में सर सैयद नगर करुला की मियां कालोनी में 13 साल के आफताब को कल बुखार के बाद एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। परिवार का आरोप है कि अस्पताल ने पांच सौ और हजार रुपये के नोट लेने से मना कर दिया और इलाज में देरी की वजह से आफताब की मौत हो गई। नोटबंदी से देशभर में कोहराम मचा है। कई जगहों से कैश की कमी के कारण वक्त पर इलाज न मिलने से मौत की भी रूह कंपा देने वाली खबरें आ रही है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और मौनपुर में नोटबंदी के दर्दनाक पहलु भी सामने आये हैं। यहां नए नोट ना होने की वजह से इलाज में देरी के कारण दो बच्चों की मौत हो गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल में 500 और हजार के नोट नहीं लिए गए और इलाज में देरी की वजह मौत बन गई। वहीं मैनपुरी में अपने बेटे को खोने वाला परिवार मोदी सरकार के फैसले को कोस रहा है और अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। यूपी के मैनपुरी में इस परिवार का आरोप है कि खुले नोट नहीं होने की वजह से इनके बच्चे की मौत हो गई। परिवार ने मैनपुरी के एक डॉक्टर पर आरोप लगाया है।
मोदी जी, मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या आप यह सब टीवी में देख रहे हैं, अखबार में पढ़ रहे हैं। क्या आपको देश के नागरिकों ने इसीलिए वोट दिया था कि वे परेशान हो जाएं। आपके मंत्री भी लोगों से सही तरीके से जवाब नहीं दे रहे हैं। चारों तरफ बिचौलिये भरे पड़े हैं। आप क्या कर रहे हैं? इन लोगों को मुआवजा देना सरकार का कर्तव्य है। अपने सारे वरिष्ठ सहयोगियों को कहें कि ऐसे परिवार का लिस्ट बनाएं और उन्हें भी शहीद का दर्जा दें। क्योंकि यह कर्तव्य एक सरकार का होता है।
यह माना कि नोट बोरियों में बंद थे, जिनमें फफूंद लग गई थी, लेकिन उसे निकालने के लिए ईमानदारी और सही टैक्स पे करने वालों को यह सजा क्यों? क्या हमें जानने का यह हक है कि वोट हम देते हैं, तो बदले में हमें ही कष्ट क्यों झेलना पड़ता है? भारत में आमतौर पर कोई भी व्यक्ति सिर्फ दो मौकों के लिए पैसा इकट्ठा करता है — एक तो मकान, दूसरा शादी। इन दोनों में खर्च किया गया रुपया वापस अर्थव्यवस्था में लौट आता है, क्योंकि यह पैसा हाथ बदलता है और इस पैसे से रोजगार पैदा होते हैं। सरकार का यह प्रयास अच्छा है, लेकिन यहां यह सवाल उठ रहा है कि इससे काला धन वापस अर्थव्यवस्था में आ जाएगा। हां, जो आंकड़े आ रहे हैं, सुन रहे हैं कि काफी हद तक कामयाबी भी मिली और टैक्स भी, लेकिन जो काला पैसा नेताओं और अफसरों के पास जमा था, क्या वह पैसा सरकार निकलवा सकी? जो आंकड़ें सामने आ रही हैं, उससे तो यही लगता है कि नोट बंद करने से सिर्फ तीन से चार फीसदी बाहर आएगा कालाधन। दरअसल, नोट बैन करने के अचंभित कर देने वाले चमत्कारिक फैसले से मैं अभिभूत हूं, खुश हूं, लेकिन मेरा सारा उत्साह अब खत्म हो गया है। यह देखकर कि लोग अपना ही पैसा उठाने के लिए रात दिन एक कर रहे हैं। रात रात भर जागकर पैसे उठाने के लिए लाइन में लगते हैं, लेकिन सुबह पता चलता है कि एटीएम क्रैश हो गया या फिर एटीएम तक पहुंचते पहुंचते नोट खत्म हो जाता है। कोई सुध लेनेवाला नहीं, कोई सुननेवाला नहीं, कोई समझने वाला नहीं, कोई समाधान करने वाला नहीं। शहर शहर कैश का कहर। कहीं मांगा नोट, कहीं मिली लाठी। सोमवार को छुट्टी होने के कारण सभी बैंक बंद थे। आधे से ज्यादा एटीएम काम नहीं कर रहे थे। कुछ लोगों ने कहा कि मोदी जी आपको हमने वोट देकर गलती की। कहीं एटीएम के बाहर पुलिस लाठी बरसा रही है, तो कहीं महिलाएं विद्रोह पर उतर आई हैं। मालदा में नगदी न मिलने पर वहां की महिलाओं ने बैंक कर्मचारियों को ताले में बंद कर दिया। इंडिया में लोगों के सब्र का बांध अब टूट रहा है और गुस्से का पारा बढ़ रहा है, ऐसे में मंगलवार को जब बैंक खुलेंगे, तो पता चलेगा कि स्थितियां और ज्यादा भयावह होती हैं या फिर थोड़ी सी सहूलियतें हुई हैं। त्राही त्राही मची हुई है, जनता की सुनें, जनता कह रही है। हमसे का भूल हुई, हमका सजा ऐसन मिली।

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