निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पुनर्विचार याचिका, फांसी की सजा बरकरार

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सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस में दोषियों की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी है। निर्भया गैंगरेप केस में चार में से तीन दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर भानुमति की बेंच ने पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। बता दें कि मौत की सजा पाए चौथे आरोपी अक्षय कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर नहीं की थी।

3 दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फांसी की सजा सही है। जस्टिस अशोक भूषण ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि आपराधिक मामलों में रिव्यू तभी संभव है, जब कानून में कोई स्पष्ट गलती हो। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी। इस मामले में कुल 6 आरोपी थे। एक आरोपी राम सिंह की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी। जबकि एक आरोपी नाबालिग था और उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया था। उसे तीन साल के बाद रिहा कर दिया गया था।

निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि हमारा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। इंसाफ मिलने में देरी हो रही है। आशा देवी ने कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाना चाहिए, ताकि निर्भया को न्याय मिल सके। वहीं, निर्भया के वकील रोहन महाजन ने संतोष व्यक्त किया और कहा कि ये हमारे लिए विजयी क्षण है। केंद्र सरकार से अनुरोध है कि वह आगे की प्रक्रिया को जल्द पूरा करे, इंसाफ जल्द से जल्द मिल सके।

बता दें कि निर्भया के साथ दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में छह लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था और गंभीर चोट पहुंचाने के बाद सड़क पर फेंक दिया था। जबकि इलाज के दौरान निर्भया की सिंगापुर में मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में कड़ा रूख अपनाते हुए दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। निर्भया केस को लेकर देशभर में रेप जैसे जघन्य अपराध के खिलाफ आवाजें बुलंद होने लगी थी।

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