दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सबरीमाला विवाद

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सर्वोच्च न्यायालय सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश संबंधी संवैधानिक पीठ के फैसले के खिलाफ दोबारा सुनवाई का आग्रह करने वाली कई याचिकाओं पर मंगलवार को निर्णय करेगा। सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय कृष्ण कौल की पीठ ने सोमवार को कहा कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई में जिस पीठ ने 28 सितम्बर को यह फैसला सुनाया था, उसे दोबारा पुनर्गठित किया जाना है।

पुनर्विचार याचिकाओं पर प्राय: मामले के संबंध में फैसला सुनाने वाली पीठ ही विचार करती है। नेशनल एसोसिएशन ऑफ अयप्पा डिवोटीज की ओर से पुनर्विचार याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग के बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सुनवाई के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। अदालत के समक्ष इस संबंध में 19 याचिकाएं लंबित हैं, जिसमें निर्णय पर दोबारा सुनवाई की मांग की गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में रजस्वला महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की वर्षो पुरानी परंपरा को समाप्त कर दिया है।

याचिकाकर्ताओं ने फैसले में प्रक्रियात्मक त्रुटियों का मुद्दा उठाकर मामले की दोबारा सुनवाई की मांग की है। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने कहा कि धार्मिक विश्वास को ‘तार्किक आधार पर परखा नहीं जा सकता। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 4:1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया था।

पीठ ने कहा था कि रजस्वला उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने देना उनके मूलभूत अधिकार और संविधान की ओर से बराबरी के अधिकार की गारंटी का उल्लंघन है। इस मंदिर में रजस्वला महिलाओं की उपस्थिति को ‘अपिवत्र’ माना जाता रहा है।

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