अब म्यांमार जाने के लिए नहीं होगी विशेष परमिट की जरूरत, खुल गई भारत-म्यांमार सीमा

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भारत और म्यांमार को जोड़ने वाले बहुप्रतिक्षित इंडो-म्यांमार फ्रेंडशिप ब्रिज को म्यांमार सरकार ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर खोल दिया। म्यांमार के तामू में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजिन कर म्यांमार की सरकार ने ये काम किया। मोदी सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत दोनों देशों की सीमा का खोला जाना एक अहम समझौता था जिसे अमली जामा पहनाया गया है।

इसकी ओपनिंग सेरेमनी में म्यांमार के लेबर मिनिस्टर, इमिग्रेशन एवं पॉप्यूलेशन परमानेंट सेक्रेटरी यू आए ल्वीन और भारत के कॉन्सुल जनरल नंदन सिंह भाईसोरा शामिल हुए। इस मौके पर भाईसोरा ने कहा, “यह भारत और म्यांमार दोनों के लिए भविष्य में बेहतर द्विपक्षीय संबंध रखने के लिए एक ऐतिहासिक और सकारात्मक शुरुआत है.”

मणिपुर की सीमा से सटे शहर मोरे में इस सीमा के खुलने के बाद अब म्यांमार जाने वाले किसी भी भारतीय को विशेष परमिट की आवश्यकता नहीं होगी। म्यांमार भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी देशों में शामिल है और भारत से 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। उग्रवाद प्रभावित नगालैंड और मणिपुर सहित पूर्वोत्तर के कई राज्य म्यांमार की सीमा से लगे हैं।

बता दें कि 11 मई को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज म्यांमार दौरे पर गई थीं। उनके म्यांमार दौरे के दौरान नेपीता में दोनों देशों के बीच इस सीमा को खोले जाने के संबंध में समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत सीमा पर एक पास के जरिए दोनों देशों के नागरिक एक दूसरे की सीमा में बिना परमिट 16 किमी. तक जा सकेंगे।

इसी के साथ तामू-मोरेह सीमा के अलावा भारत म्यांमार सीमा से लगे रिखावदार (चिन प्रांत) और जोखावतार (मिजोरम) की भी सीमा खोल दी गई है। बता दें कि पहले ही दोनों देश रोड संपर्क मे सुधार करने की दिशा में पहल कर चुके हैं। जिसके तहत दो बड़े प्रोजेक्ट और 69 पुलों के नवीकरण का काम 2020 तक पूरा हो जाएगा।

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