ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से बिगड़े अमेरिका-रूस के रिश्ते : पुतिन

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मॉस्को : सीरिया विवाद का असर रूस-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर दिखने लगा है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका और रूस के रिश्ते और बिगड़े हैं। एक-दूसरे पर भरोसा कमजोर हुआ है। यह कहना है रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का। सरकारी टीवी पर बुधवार को प्रसारित एक साक्षात्कार में उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद से दूरी बनाने की अमेरिकी मांग भी खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि असद को अकेला छोड़ने का मतलब होगा आतंकियों को खुला छोड़ देना। यह साक्षात्कार ऐसे समय में प्रसारित किया गया जब अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन मॉस्को में हैं। रूस के लिए रवाना होने से पहले टिलरसन ने कहा था कि रूस को अमेरिका या असद में से किसी एक को चुनना होगा। चार अप्रैल को सीरिया के इदलिब प्रांत के खान शेखहुन में रासायनिक हमले के बाद से ही दोनों देशों में तनाव चरम पर है। हमले के जवाब में अमेरिका ने सीरियाई एयरबेस पर मिसाइल दागे थे और रूस से असद को समर्थन बंद करने को कहा था। इस माहौल में मॉस्को पहुंचे टिलरसन की यात्रा पर सबकी नजरें है। वे रूस जाने वाले ट्रंप कैबिनेट के पहले मंत्री हैं। लेकिन रूस ने उनकी मेजबानी में वो गर्मजोशी नहीं दिखाई जिसकी उम्मीद थी। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने द्विपक्षीय बैठक में मिसाइल हमले का मामला उठाते हुए इसे गैर कानूनी बताया। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रायबकोव ने सीरिया पर अमेरिकी रणनीति को रहस्यपूर्ण करार दिया। हालांकि टिलरसन ने कहा है कि वे सभी मसलों पर खुलकर और व्यापक चर्चा को तैयार हैं। संयुक्त राष्ट्र के सीरियाई दूत स्टीफन डि मिस्तुरा ने भी दोनों देशों से मतभेद खत्म करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रासायनिक हमले की जांच से जुड़े प्रस्ताव पर मतदान से पहले उन्होंने यह टिप्पणी की। रूस पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान करेगा। गौरतलब है कि सीरिया में छह साल से जारी गृहयुद्ध में चार लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। असद के खिलाफ संघर्षरत विद्रोहियों को रूस आतंकी बताता है। 2015 से वह सीरिया में हवाई अभियान भी चला रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश असद को सत्ता से बाहर किए जाने के पक्ष में हैं। लेकिन, रूस के विरोध के कारण वे अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। करतूतों पर पर्दा डाल रहा रूस अमेरिका ने सीरियाई सेना के करतूतों पर पर्दा डालने का आरोप रूस पर लगाया है। रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा है कि खुफिया व अन्य रिपोर्टों से साफ है कि रासायनिक हमला सेना ने ही किया था। लेकिन, रूस गलत सूचनाओं और झूठी कहानियों से दुनिया को मूर्ख बनाना चाहता है। मेटिस ने कहा कि सीरिया को नपा तुला जवाब देने के लिए मिसाइल हमला किया गया था। यदि फिर से सीरिया रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करता है तो उसे बेहद भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। मिसाइल हमले का अमेरिका के शीर्ष सीनेटर जॉन मैक्केन, लिंडसे ग्राहम ने भी समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि अब ऐसी रणनीति बनाने की जरूरत है जिससे अमेरिका और उसके सीरियाई सहयोगियों के हितों की रक्षा हो।
कोटेशन
सरकारी टीवी पर बुधवार को प्रसारित एक साक्षात्कार में उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद से दूरी बनाने की अमेरिकी मांग भी खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि असद को अकेला छोड़ने का मतलब होगा आतंकियों को खुला छोड़ देना।

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