ताजमहल में बाहरी लोगों को नमाज की इजाजत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कहीं और पढ़ें नमाज

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ताजमहल परिसर में बाहरी लोगों को नमाज अदा करने से रोकने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक है और इसलिए ताजमहल परिसर में नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ताजमहल में नमाज पढ़ने की जरूरत क्या है, कहीं और भी तो नमाज पढ़ी जा सकती है।

दरअसल, ताज के अंदर बनी मस्जिद में हर शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा की जाती है जिसमें स्थानीय लोग हिस्सा लेते हैं। वहीं, स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना मिली थी कि कुछ बाहरी लोग भी नमाज अदा करने परिसर में आ रहे हैं। आगरा प्रशासन ने 24 जनवरी को निर्देश दिया था कि जुमे की नमाज अदा करने के लिए जरूरी पहचान पत्र के साथ केवल स्थानीय लोग ही परिसर में दाखिल हो सकते हैं। वहीं, प्रशासन के इस आदेश को एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

ताजमहल पर्यटकों के लिए शुक्रवार को नहीं खोला जाता है। प्रशासन का कहना था कि उन्हें ये सूचना मिली थी कि कुछ बांग्लादेशी और गैर-भारतीय भी ताज परिसर में नमाज अदा करने दाखिल हो रहे हैं। लिहाजा सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने ये निर्देश दिया कि केवल स्थानिय लोग ही परिसर में दाखिल हो सकते हैं जो आगरा के रहने वाले हैं और उनको अपना पहचान पत्र दिखाना होगा। स्थानीय प्रशासन द्वारा ये कहा गया था कि किसी बाहरी के दाखिल होने पर तुरंत इसकी सूचना उन्हें दी जाए।

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