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टॉइलट अब्यूज से लग रहा उड़ानों पर ब्रेक

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नई दिल्ली : पिछले दिनों दिल्ली से शिकागो जा रही फ्लाइट के 8 टॉइलट की खस्ता हालत के कारण यात्रियों की हुई परेशानी का मामला सामने आया था। इस घटना से टॉइलट अब्यूज का मामला सामने आया है। विमानन कंपनी का कहना था कि यात्रियों ने टॉइलट में प्लास्टिक की बोतल और अन्य कचड़ा फेंक दिया था जिससे यह इस्तेमाल करने लायक नहीं था। विमान के टॉइलट के अंदर एक यात्री कुछ भी करे इसका सीधा असर एयरलाइन्स की कमाई पर पड़ता है। इस पर विमानन कंपनी का कोई नियंत्रण नहीं होता। टॉइलट को यात्री किसी भी हालत में छोड़ जाएं लेकिन सोचना तो विमानन कंपनी को होता है कि आगे की फ्लाइट के लिए उड़ान भरी जाए या फिर ग्राउंड पर इसे दुरुस्त किया जाए। एक एयरलाइन के सूत्र ने बताया, अगर कोई यात्री किसी टॉइलट में कुछ फेंकता है जैसे प्लास्टिक बॉटल, डायपर या फिर टीसू पेपर, इससे वैक्यूम फ्लश सिस्टम खराब हो जाता है। टॉइलट पाइप से फेंकी हुई चीज निकाली जाती है और फिर फ्लश को ठीक कराया जाता। इससे फ्लाइट में देरी होती है। एयर इंडिया की एक वरिष्ठ केबिन क्रू सदस्य ने बताया, पुराने विमान में ब्लू लिक्विड केमिकल टॉइलट फ्लस सिस्टम होते थे। जब कोई जाम होता था, हम उसमें गर्म पानी डालते थे और कुछ देर बाद फ्लश करते थे जाम ठीक हो जाता था। लेकिन अब बोइंग 777 और 787 जैसे कुछ विमानों में वैक्यूम फ्ल्श है जो अडवांस तकनीक है, लेकिन एक बार अगर ये फ्लश जाम हो गए, फिर कुछ नहीं किया जा सकता। जब टॉइलट इस्तेमाल की स्थिति में नहीं रहता फिर केबिन क्रू लॉग एंट्री करता है और हर महीने कम से कम 30 से 60 लॉग एंट्री की घटना सामने आती है और बताया जाता है कि किसी यात्री ने टॉइलट में बॉटल, कचड़ा या ऐसी ही कोई और चीज फेंक दी है। बता दें कि शनिवार को दिल्ली से शिकागो जा रही एयर इंडिया के बोइंग 777 विमान के यात्रियों को धरती से हजारों फुट ऊपर टॉइलट की कमी से जूझना पड़ा। 17 घंटे की जर्नी के दौरान 4 टॉइलट बंद पड़े रहे, जबकि बाकी आठ भी लैंडिंग से दो घंटे पहले भी बंद कर दिए गए थे। विमान ने दिल्ली में आधी रात को 2 बजे के बाद उड़ान भरी थी और अगले 16 घंटे की यात्रा उनके काफी तकलीफदेह रही। इस विमान में 324 वयस्क, 7 बच्चे और 16 क्रू मेंबर्स शामिल थे। दिल्ली से शिकागो जा रही विमान के साथ हुई घटना पर भले ही एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कुछ नहीं कहा, लेकिन यह टॉइलट अब्यूज के मुद्दे को सामने लेकर आया है। एयर इंडिया के अधिकारी ने बताया, पिछले अगस्त में नेवार्क से मुंबई जा रही फ्लाइट को इस्तांबुल में उतारना पड़ा, क्योंकि टॉइलट इस्तेमाल के लायक नहीं थे। लेकिन 5 जून से अगस्त 23 तक बेहद खराब स्थिति रही, जब गंदे टॉइलट के कारण लंदन, नेवार्क, शिकागो और न्यू यॉर्क जाने वाली 14 फ्लाइट में देरी हुई। एयर इंडिया के अधिकारी ने बताया कि दुनियाभर के एयरलाइन्स को यह झेलना पड़ता है, लेकिन भारतीय एयरलाइन्स की तरह नहीं। समस्या यह है कि लोगों में सिविक मैनर्स नहीं है और संस्कृति का भी फर्क है। टॉइलट पश्चिम की तरह बनाए गए हैं, जिसमें टॉइलट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है। भारतीयों को पानी का इस्तेमाल करने की आदत है। उन्होंने कहा, ‘कुछ यात्रियों को दूसरों की बिल्कुल परवाह नहीं होती। वे टॉइलट गंदी छोड़ देते हैं जहां हर तरफ पानी होता है। पानी भरने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पेपर कप और बोतल तक कमोड में गिरे मिलते हैं।’
कोटेशन
एक एयरलाइन के सूत्र ने बताया, अगर कोई यात्री किसी टॉइलट में कुछ फेंकता है जैसे प्लास्टिक बॉटल, डायपर या फिर टीसू पेपर, इससे वैक्यूम फ्लश सिस्टम खराब हो जाता है। टॉइलट पाइप से फेंकी हुई चीज निकाली जाती है और फिर फ्लश को ठीक कराया जाता। इससे फ्लाइट में देरी होती है।

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