जस्टिस कर्णन ने लिखा सीजेआई लिखा को खत

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नई दिल्ली : जस्टिस सी एस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और संवैधानिक पीठ को चिट्ठी लिखकर कहा है कि उनकी प्रतिष्ठा को चोट पहुंची है और इसके हर्जाने के रूप में 14 करोड़ दिए जाएं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया और सरेआम उनकी बेइज्जती की गई है जिसके चलते उन्हें यह रकम दी जाए। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कल कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्णन के खिलाफ अवमानना से जुड़े एक मामले में अदालत के सामने पेश न होने के चलते वारंट जारी किया है। उच्चतम न्यायालय ने सख्ती दिखाते हुए कर्णन को 10,000 रुपए का निजी बॉन्ड भरने का भी आदेश दिया है।
कर्णन ने फैसले को बताया असंवैधानिक
कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शुक्रवार को कहा कि उनके खिलाफ अवमानना मामले में जमानती वारंट जारी करना असंवैधानिक है। उन्होंने कहा, आज जमानती वारंट जारी किया गया। इस पर रोक लगाई जाएगी। इनके पास मेरे खिलाफ वारंट जारी करने का अधिकार नहीं है। यह असंवैधानिक है।
सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त
अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जस्टिस कर्णन ने अवमानना के मामले में अदालत में पेश होने से इनकार कर दिया है। यह सुनकर सुप्रीम कोर्ट का रवैया और सख्त हो गया और कोर्ट ने नियम के मुताबिक जस्टिस कर्णन के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया। इस केस की सुनवाई कर रही बेंच के सदस्यों में सीजेआई केहर के अलावा जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हैं।
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क्या है मामला?
जस्टिस कर्णन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का नोटिस जारी किया था। कर्णन ने चीफ जस्टिस को दो पत्र लिखकर मद्रास उच्च न्यायालय के कुछ न्यायाधीशों पर आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी बताया कि उन्हें आठ मार्च को जस्टिस कर्णन से एक संदेश मिला था, जिसमें लिखा था कि वे सीजेआई और दूसरे जजों से मिलना चाहते हैं। उनके संदेश में कहा गया था कि वे कुछ चुनिंदा प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं और यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि उन्होंने क्यों आरोप लगाए हैं।
कोटेशन
जस्टिस कर्णन ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया और सरेआम उनकी बेइज्जती की गई है जिसके चलते उन्हें यह रकम दी जाए।

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