कामकाजी महिलाएं, समस्या और निदान

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womenनीलोफर

आज के युग में औरत और मर्द सभी समान रूप से बाहर निकल कर काम करते हैं। इस सभ्य समाज में महिलाओं का बाहर निकल कर आॅफिस में काम करना गलत नहीं माना जाता, बल्कि उन्हें बराबरी का दर्जा दिया जाता है। वैसे, यदि यह कहें कि इस कम्पटीशन के दौर में दोनों का काम करना जरूरी है, तो शायद गलत नहीं होगा, क्योंकि महिलाओं के बाहर निकल कर काम करने से जहां घर में आर्थिक तंगी दूर होती है, वहीं कुछ समस्याएं भी अपने आप जन्म लेती हैं। सच तो यही है कि कामकाजी महिलाओं को घर और बाहर दोनों जगह बैलेंस बना कर चलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बच्चों की देख-रेख में भी समस्या आती है। परिवार के साथ भी ताल-मेल बना कर चलना पड़ता है। पति की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है और सास ससुर को भी इग्नोर करना सही नहीं होता। कामकाजी महिलाएं अगर घर और आॅफिस में तालमेल बना कर काम ना करें, तो बच्चे, पति, परिवार सब सफर करते हैं। आज के युग की यह एक बड़ी समस्या है। आइए जानने की कोशिश करें कि इसका निदान क्या हो सकता है।
दोहरी जिम्मेदारी : कामकाजी महिलाओं पर घर और बाहर दोनों जगह की जिम्मेदारी होती है। उन्हें दोहरी जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ता है। एक तरफ घर की जिम्मेदारी है, जिसमें पति और बच्चे व पूरा परिवार है, तो दूसरी तरफ आॅफिस और उसकी जिम्मेदारियां भी हैं। दोनों में से किसी को भी इग्नोर नहीं किया जा सकता। काम का दोहरा बोझ और जिम्मेदारी को बेहतर निभाने के चक्कर में औरतें बहुत टेंश्ड हो जाती हैं। फलस्वरूप उनकी सेहत पर असर पड़ने लगता है। ये दोनों जिम्मेदारियां किसी तरह छोड़ी नहीं जा सकतीं। लेकिन हां, थोड़ी सूझ-बूझ से इसे बेहतर जरूर बनाया जा सकता है। इस दोहरे बोझ को कम करने और एक बेहतर लाइफस्टाइल के लिए एक रूटीन फिक्स करना होगा। दरअसल, ऐसा करने से ही वे अपने परिवार और आॅफिस के काम में बैलेंस कर सकेंगे। सुबह जल्दी उठना इसके लिए फायदेमंद होता है। काम के हिसाब से अपने समय का बंटवारा कर लें। कुछ समय घर का काम निपटाने के लिए रखें, कुछ बच्चों के लिए, कुछ पति के लिए, कुछ अपने लिए और घर से आॅफिस पहुंचने तक का समय। हां, पांच से दस मिनट अपने रेस्ट के लिए भी निकालें, ताकि आप चाक-चौबंद होकर आॅफिस जा सकें। आॅफिस और घर के काम को एक दूसरे में गडमड ना करें। आॅफिस का काम आॅफिस में और घर का काम घर में करें, तो बेहतर। शाम को कुछ समय अपने परिवार के लिए भी निकालें और कुछ अपने आराम के लिए। अगर आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत है, तो आप हेल्पिंग हैंड भी रख सकती हैं।

घर और आॅफिस की देखभाल : घर और आॅफिस दोनों आपके लिए जरूरी है। महिलाएं परिवार का बैकबोन होती हैं, क्योंकि उनके बिना परिवार का कोई अस्तित्व नहीं। लेकिन आजकल की लाइफ में औरतें केवल परिवार तक ही सिमित नहीं हैं, बल्कि उनका फैलाव घर से बाहर निकल कर जॉब और बिजनेस में भी हो गया है। सच तो यही है कि उनके सर पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है। उन्हें घर और बाहर दोनों को मेनटेन करना पड़ता है। इसलिए उन्हें समझदारी से काम लेना होगा कि उन पर ज्यादा बोझ ना पड़े, ताकि दोनों जगह की जिम्मेदारी अच्छी तरह से निभाई जा सके। आॅफिस के तो रोज के काम हैं। घर में भी कुछ काम रोज निपटाए जाते हैं, लेकिन कुछ काम हफते में एक दिन भी किया जा सकता है। बच्चे के स्कूल की तैयारी, पति के आॅफिस की तैयारी, आपके आॅफिस की तैयारी। रोज का काम है कपड़े साफ करना, घर की सफाई, बच्चों के स्कूल की कॉपियां चेक करना। बच्चों के साथ कहीं घूमने जाना, मार्केटिंग करना, रिश्तेदारों से मिलना बच्चों की कोई स्पेशल फरमाइश पूरी करना, यह सब हफते में किया जा सकता है। आप उन कामों का एक लिस्ट बना लें, जिन्हें रोजाना करना है और उसे भी जिसे हफते में करना है। उसी के हिसाब से आप अपना रूटिन तय करें। इससे आप पर फालतू बोझ नहीं पड़ेगा और आप आॅफिस व घर में बेहतर तालमेल बैठा पाने में सक्षम होंगी।

बच्चों की देख रेख : आप चाहे कामकाजी हैं या नहीं, लेकिन बच्चों की देख-रेख की जिम्मेदारी महिलाओं की ही होती है। अगर आप कामकाजी महिला हैं, तो बच्चे की देख-रेख में आपको बहुत सचेत रहना पड़ेगा। आज का दौर ऐसा है कि बच्चों को गलत रास्ते पर जाने में वक्त नहीं लगता। घर बैठे ही बहुत से ऐसे साधन हैं, जिससे बच्चे बिगड़ सकते हैं। आपके पास इतना समय नहीं कि आप हर समय बच्चे को वाच करें, बल्कि एक सीमित समय में ही आपको उनके लिए सब कुछ करना होगा। बच्चों को समय पर स्कूल के लिए तैयार करना, उनको समय पर नाश्ता बना कर देना और समय समय पर उनका प्रोग्रेस रिपोर्ट देखना। कुछ बच्चे मां के हाथ से खाना पसंद करते हैं। ऐसे में आप डांटने के बजाए पांच मिनट निकाल कर उन्हें नाश्ता करा दें या उन्हें प्यार से अपनी मजबूरियां बताएं। दिन भर आपके बच्चे आप से अलग रहते हैं। शाम को आप उन्हें अपना ज्यादा वक्त दें। इससे बच्चों में अकेलेपन का एहसास नहीं होगा। समय समय पर उनकी छोटी-छोटी ख्वाहिशों को भी पूरी करने की कोशिश करें। उन्हें अपने पास बिठा कर उन से उनकी सारे दिन की बातें सुनें। उन्हें बहुत अच्छा लगेगा। इस तरह कामकाजी महिलाएं बच्चों की बेहतर देख-रेख कर सकती हैं।

पति का ख्याल : पति आपके जीवन का एक अभिन्न अंग है। इसे नकारा या इग्नोर किया ही नहीं जा सकता। आप कुछ समय अपने पति के लिए भी निकालें। उनकी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरी करने की काशिश करें। कोशिश करें कि शाम की चाय पति के साथ ले सकें। उनकी परेशानियों को सुनें और दिन भर की मसरूफियतों पर चर्चा करें। उन्हें अच्छा लगेगा। समय निकाल कर कुछ क्षण उनके साथ बिताएं। आपके समय पर आपके पति का भी अघिकार है। अपने आॅफिस की परेशानियां उनसे शेयर करें, लेकिन जब वहअच्छे मूड में हों, तो। अपनी थकान का रोना रोने के बजाए उन्हें यह फील कराएं कि मुझे आपकी फिक्र है। उन्हें अच्छा लगेगा। इतनी बिजी लाइफ होने के बाद भी आप उनका ध्यान रखती हैं।

परिवार का ख्याल : औरत जहां एक मां और पत्नी है वहीं भाभी, चाची, ताई भी होती हैं। इनके प्रति उनकी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। परिवार को अपने बहू से कुछ आशाएं होती हैं। वे चाहते हंै कि बहू मर्यादाओं में रह कर उसका ख्याल रखे। उन्हें इन रिश्तों के साथ ताल-मेल बना कर रखना चाहिए।

सास ससुर का ख्याल : एक औरत के साथ कितने रिश्ते जुड़े रहते हैं। बहू के नाते सास ससुर का ख्याल रखना भी बहू का फर्ज है। कामकाजी महिला के पास समय की कमी होती है, परंतु सास ससुर के लिए समय निकालना भी जरूरी है। उनके प्रति बहू की कुछ जिम्मेदारी होती है, क्योंकि वे आपके पति के माता पिता के साथ आपके बच्चों के दादा दादी भी हैं। इस नाते आपका उनसे निकट का रिश्ता है। आपके पीछे बच्चों और घर की देख-भाल उन्हीं के जिम्मे होती है। उन्हें समय पर खाना देना, उनकी सेहत का ख्याल रखना, उनकी सेवा करना। जैसे आप अपने पति और बच्चों का ख्याल रखती हैं, उसी तरह अपने सास ससुर का भी ख्याल रखें। दरअसल, यह भी आपका फर्ज है।

समय पर आॅफिस पहुंचना : आप घर के काम निपटा कर समय से आॅफिस पहुंचें। समय पर आॅफिस नहीं पहुंचने से आपकी इमेज खराब हो जाएगी। बॉस की डांट सुननी पड़ सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि आपको काम से निकाल दिया जाए। आपने आॅफिस की कुछ जिम्मेदारी ली हुई होती है और उसे समय से पहुंच कर ही निपटाया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि काम पर समय से पहुंचें। आॅफिस जाने तक के समय का बटवारा कर लें। उसी के हिसाब से आप बिस्तर छोड़ें। हो सकता है कि इसके लिए आपको सुबह जल्दी उठने की आदत डालनी पड़े। नो प्रॉब्लम, जल्दी उठने से आपको टाइम भी ज्यादा मिलेगा और आॅफिस के लिए देर भी नहीं होगी। कोशिश करें कि सूरज निकलने से पहले उठ जाएं। आपका मन प्रसन्न रहेगा और आपके अंदर ऊर्जा का संचार होगा। इससे काम में भी मन लगेगा।
नी८‘

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