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अब आर्य समाज में भी लगेगा प्यार पर पहरा

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picग्वालियर : आर्य समाज के मंदिरों में अब प्रेम विवाह आसानी से नहीं हो पाऐगे। नए नियमों के तहत प्रेम विवाह करने वालों को अपने माता पिता से रज़ामंदी लेनी होगी। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने विवाह को लेकर 12 दिशा निर्देश दिए हैं, जिसमें यह बात कही गई है कि युवक युवती के माता पिता और पुलिस को विवाह की जानकारी देनी होगी। इसके बाद युगलों के लिहाज से कई तरह के पेंच सामने हैं मगर एक तरह से आर्य समाज के इस कार्य को अभिभावकों द्वारा सराहा जा रहा है।
दरअसल विवाह के लिए परिजन की स्वीकृति लेना पड़ती है। पुलिस को मंदिरों में होने वाले विवाह की जांच करना होगी। साथ ही युवक युवतियों की आयु का वेरीफिकेशन भी करवाना होगा। दरअसल इस मामले को लेकर एक याचिका उच्च न्यायालय में दायर की गई थी। याचिका में गौरव समाधिया ने एक केस सामने रखा था जिसमें कहा था कि युवती ने घर में जानकारी दिए बिना घर से अलग होकर विवाह रचा लिया था।
दरअसल इस लड़की ने आर्य समाज मंदिर में प्रेम विवाह करने का प्रमाणपत्र भी न्यायालय में पेश किया था, जिसके बाद न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को आर्य समाज के मंदिर में आयोजित होने वाले विवाह की जांच करने का आदेश भी दिया था। पुलिस ने जिले के आर्य समाज मंदिर की जांच कर बंद लिफाफे में रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
हालांकि पुलिस ने न्यायालय में करीब 270 विवाह की जानकारी दी थी तो दूसरी ओर समाज के मंदिरों में होने वाले विवाह के रिकाॅर्ड की जानकारी नहीं देने की जानकारी भी दी थी। दरअसल जिस विवाह को लेकर गौरव ने याचिका दायर की थी उसका शपथपत्र मंदिर प्रबंध समिति के पास नहीं था।
ऐसे में न्यायालय ने इस विवाह के अवैध करार दिया। इसके बाद से ही आर्य समाज ने अपना निर्णय बदला और आदेश दिया कि 100 रूपए के स्टाम्प पर युवक और युवती से विवाह से जुड़ा शपथ पत्र लेना जरूरी है। इतना ही नहीं उन्हें अपने निवास की जानकारी और माता पिता का उल्लेख करना होगा। लोगों से अपील की गई है कि यदि लड़की गुमशुदा होती है और उसका प्रकरण दर्ज होता है तो वे आर्य समाज मंदिर में भी संपर्क करें।

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